November 1, 2020
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13-वर्षीय-आदिवासी मूक-बधिर दुष्कर्म के बाद हुई गर्भवती,,,समाज के ठेकेदारों ने करवाया गर्भपात,,,मामले को दबाने का पूरा प्रयास।

संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।
संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।

13-वर्षीय-आदिवासी मूक-बधिर दुष्कर्म के बाद हुई गर्भवती,,,समाज के ठेकेदारों ने करवाया गर्भपात,,,मामले को दबाने का पूरा प्रयास।

कोटा-थाने में अपराध-पंजीबद्ध होने के 36-घण्टों के अंदर ही नामजद आरोपी गिरफ्तार,,,सभी के सभी आरोपी जेल दाखिल।

मामले को दबाने का प्रयास करने वाले अज्ञात-लोग कोटा पुलिस के रडार में,,,पुलिसिया जांच के बाद हो सकती अन्य लोगो की भी गिरफ्तारी।

*दिनांक:-30/09/2020*

*संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*

करगीरोड कोटा:-एक 13-वर्षीय मूक-बधिर आदिवासी नाबालिग बच्ची दुष्कर्म का शिकार होने के बाद गर्भवती हो जाती है-?पर समाज के ठेकेदारों के द्वारा पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाए सामाजिक बैठक करते हुए उसका गर्भपात कराने के तुगलकी-फरमान के बाद उस नाबालिग मूकबघिर बच्ची का दबाव पूर्वक चुपके से गर्भपात करा दिया जाता है, इस पूरे घटना के बाद सरकारो के द्वारा जारी सरकारी-स्लोगन “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” बेटियों की सुरक्षा के लिए की बनाए जाने वाली तमाम योजनाओं केवल स्लोगन बनकर या फिर नेताओ के चुनावी रैली में बड़े-बड़े भाषण मंत्रीयो के और संबंधित-विभागों के अधिकारियों की बैठकों के बाद फाइलों में दम तोड़ देती है।*

समाजिक-बैठक में समाज के ठेकेदारों ने देश के संविधान के विपरीत जाकर तुगलकी फरमान सुनाया:—

*पूरा मामला कोटा-थाना अंतर्गत बेलगहना चौकी के ग्राम पंचायत करहीकछार के आश्रित ग्राम सरगुजिहापारा की है, जहां एक उरांव समाज की 13 वर्षीय आदिवासी मूकबधिर-नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद वह गर्भवती हो जाती है, इस दौरान घटना को अंजाम देने वाले आरोपी के खिलाफ पुलिस मे सूचना देने के बजाय समाज के ठेकेदारों द्वारा बैठक कर इस घिनौने-अपराध की शिकार आदिवासी मूकबघिर नाबालिग-लड़की को अन्यत्र ले जाकर उसका गर्भपात करा दिया जाता है, सूत्रों के हवाले से कुछ स्थानीय-जागरूक ग्रामीण के जिनकी आत्मा मरी नही थी, उक्त मामले से उन तमाम जिम्मेदार-प्रशासनिक-अधिकारियों को अवगत कराया गया, ताकि मूकबधिर-नाबालिग लड़की को गर्भपात जैसे गुजरे बेहद बुरे दौर के बाद कम से कम स्वास्थ्य सुविधा ही मिल सके ताकि उसका जीवन सुरक्षित हो, घटना के बाद बड़ी ही दुखद पहलू ये रही दुष्कर्म का शिकार नाबालिग-बच्ची अपने पेट में 3 से 4 माह का गर्भ लिए घर परिवार, मोहल्ला और समाज की चारदीवारी में घूमती रही, बच्ची न ही मुह से कुछ बोल पाती न ही कानो से सुन सकती, इसके साथ एक दुखद पहलू ये भी रही कि पीड़िता की माँ भी पीड़िता के साथ नही रहती थी, इस घटना के बाद समाज के ठेकेदारों के द्वारा पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाए भरे-पंचायत में तुगलकी-फरमान सुनाया।*

*इस पूरे घटनाक्रम के बाद नाबालिग के गर्भपात के निर्णय में ग्राम-पंचायत करहीकछार के सरपंच भी बैठक में शामिल थे, जहाँ सरपंच व समाज के अन्य लोगों के बीच गांव में बैठक बुलाया गया था, लेकिन मीडिया के सवाल पर सरपंच के द्वारा अपनी मौजूदगी का इंकार कर दिया गया, समाज की एक मूकबधिर नाबालिग बेटी गर्भवती हो गई थी, और गांव में तरह-तरह की चर्चा भी हो रही थी, पहले नाबालिग को जंगली जड़ी-बूटी खिलाकर गर्भ गिराने का प्रयास किया गया, लेकिन जब ये मंसूबा भी पूरा नही हो पाया तो आनन-फानन में उसे पहले गनियारी ले जाया गया, जहां नाबालिग-बच्ची का गर्भपात करनें से साफ इंकार कर दिया गया जिसके बाद सूत्रों के हवाले से पीड़ित को कोरबा जिले के कटघोरा स्थित किसी निजी-क्लिनिक में ले जाकर गर्भपात करवाए जाने की खबर की जानकारी प्राप्त हो रही है, बहरहाल एक नाबालिग लड़की-जिसकी उम्र अभी खेलने कूदने और पढ़ने लिखने की है, जो की दिन-दुनिया की झमेले से बेखबर उस बच्ची का गर्भवती हो जाना और फिर मामले की शिकायत परिजनों और आसपड़ोस के लोगों द्वारा नहीं करना तथा इस घटना की सूचना पश्चात भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मामले को गंभीरता से संज्ञान में नहीं लेना, अपने आप में कई गंभीर-सवालों को जन्म देता है।सोचनीय बात है कि बेलगहना पुलिस-चौकी से महज कुछ ही दूरी पर करहीकछार मोहल्ला स्थित है, जहां यह पूरी घटना घटित हुई है, ऐसे में पुलिस का सूचना-तंत्र फेल होने के साथ साथ मोहल्ले में महिला-बाल विकास-विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र जहां कार्यरत-कार्यकर्ता और सहायिका बेखबर रही-?गांव का कोटवार बेखबर रहा-? गांव का सरपंच बेखबर रहा-? गांव का पंच बेखबर रहा-? पंचायत का सचिव बेखबर रहा-?स्वास्थ्य विभाग का जमीनी-कार्यकर्ता बेखबर रहा या फिर जानबूझकर सबके सब बेखबर रहे-?वो इसलिए की मासूम मूकबघिर बच्ची आदिवासी गरीब परिवार से है, और अक्सर गरीब-कमजोरो की आवाज समाज के ठेकेदारों या फिर प्रशासन में बैठे जिम्मेदार लोगों के कानों तक पहुचकर भी नही पहुच पाती।*

*मामले में एफआईआर दर्ज होने के 36-घण्टों बाद ही आरोपीयो को कोटा-पुलिस ने गिरफ्तार किया:—*

*देर सबेर इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़िता की मां के द्वारा कोटा-थाने में जाकर पीड़िता के साथ मामले के आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर कराया गया जिसके बाद कोटा-पुलिस ने मामले की गंभीरता को लेते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने उच्च-अधिकारियों को देते हुए अधिकारियों के मार्गदर्शन में मामले की जांच में तेजी दिखाते हुए एफआईआर होने के 36-घंटे बाद ही मामले से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया उसके अलावा कोटा पुलिस व उच्च-अधिकारियों के द्वारा इस मामले से जुड़े अन्य अज्ञात लोग, जो कि इस पूरे मामले को दबाने के लिए अपनी तरफ से भरपूर प्रयास किया गया ऐसे लोग भी कोटा-पुलिस की रडार में है, आज कोटा-थाने में एसडीओपी कोटा रश्मित कौर चावला व थाना प्रभारी प्रकाशकांत के द्वारा मीडिया के सामने आरोपियों को पेश करने के बाद उक्त बातें कही गई, खासकर एसडीओपी कोटा ने उक्त मामले से जुड़े अन्य लोगो के खिलाफ भी कार्यवाही करने की बात पुनः दोहराई, कोटा-पुलिस ने अपराध क्रमांक 389/ 2020 आईपीसी की धारा 376 313, 34 ता.ही.6-पॉक्सो-एक्ट के तहत आरोपी अजय मिंज/पिता लोहार साए उम्र 18 साल, दशरथ मिंज/पिता स्व: मनोहर मिंज उम्र 65 साल सियाराम मिंज/पिता दशरथ मिंज 28 साल, केलनतरी /पति सियाराम मिंज उम्र 25 साल को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, मामले में अन्य अज्ञात लोगों की भी जल्द ही गिरफ्तारी होने की बात कोटा पुलिस ने कही है, देखना होगा मामले के बड़े समाजिक ठेकेदारों सहित अन्य विभागीय लोगो का न.भी कब तक आता है।*

 

हरित

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