September 25, 2021
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सरकारी स्कूल हो रहे हाईटेक राजधानी रायपुर की तीन सौ स्कूलों मे आर्कषक रंगरोगन

 

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर/ प्रदेश के स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर बदल रही है। अब कक्षाओं में छात्रों की पढ़ाई, पहले से ज्यादा सुविधाजनक और हाईटेक हो गई हैं। जहां सरकार स्कूलों मे र्स्माट क्लास, ई-क्लास, पुस्तकालय, एडवांस लेब व नवाचार हेतु लर्निंग कार्नन जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। राजधानी रायपुर की अगर बात करे तो यहां जिला शिक्षा अधिकारी ए.एन. बंजारा के नेतृत्व में प्राचार्यों ने कमाल का ऐतिहासिक कार्य किया। अपने स्कूल को स्मार्ट बनाने न केवल शिक्षक-छात्र बल्कि पालक भी जुड़ गए बल्की अपनी सहभागिता देते हुए अपनी तरफ से भी खर्च किया है।
वहीं बच्चों और अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा द्वारा आपसी सहभागिता निभाते हुए स्कूल की कक्षाओं को छात्रों के मनपसंद रंगों से सजाया गया है। हालांकि क्लासरूमों को रंगीन कलर करने का पहल जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा किया गया था अधिकारियों की मंशा थी कि कक्षाओं को कलरफुल बनाने से कक्षा का रोचक वातावरण मे बेहतर अहसास होगा और पढ़ाई के प्रति बच्चों में रुचि बढेगी। शिक्षा विभाग द्वारा रायपुर जिले में इसकी पहल की गई वहीं जिले के स्कूली बच्चें ,पालक और शिक्षकों ने भी इसे हाथों हाथ लेते हुए बगैर सरकारी सहायता के ही स्कूली कक्षाओं कों मनपंसद रंगो से पोताई करवाते हुए स्कूली कक्षाओं की नई तस्वीर पेश कर दी। बच्चों मे अपनी कक्षाओं को कलरफूल बनाने इतना ज्यादा उत्साह देखा गया कि कई स्कूलों मे महज पेंट कलर और ब्रश व पंेटर उपलब्ध होते ही बच्चों ने पेंटरों को बाहर का रास्ता दिखाकर बच्चों द्वारा अपने अकुशल हाथों से ही अपने क्लासरूम को कलरफूल कर दिया। शिक्षा विभाग के इस नए व अनोखे पहल की वजह का ही नतीजा है कि राजधानी रायपुर के तीन सौ से ज्यादा स्कूलों मे नए कलेवर की क्लासरूम देखने को मिल रहा है कलरफूल क्लासरूम मे बैठे बच्चों के चेहरे चहकते दिखाइ दे रहे बच्चों का कहना था कि पिछले कई वर्षों स्कूल व कक्षाओं का रंग खाकी व गुलाबी था जिसका रंग बच्चों को रास नहीं आ रहा था शिक्षा विभाग की पहल की वजह से ही यह संभव हो सका है कि बच्चों और अभिभावकों की सहभागिता से एक साल की मेहनत मे ही राजधानी के तीन सौ स्कूल की कक्षाएं फिर से नए कलेवर के साथ चमकने लगी है।

 

जिला शिक्षा अधिकारी ए.एन. बंजारा द्वारा स्कूलों मे नई तकनीकी के माध्यम से शिक्षा का प्रस्ताव कलेक्टर के समक्ष रखा। उन्हें भी यह संकल्पना अच्छी लगी और कलेक्टर की सैद्धांतिक सहमति मिलते ही इसे अमलीजामा पहनाते हुए कार्यरूप् दिया गया जिसका नतीजा है कि वर्तमान दौर मे प्रदेष की राजधानी रायपुर स्थित तीन सौ से ज्यादा स्कूलों देश के कई स्कूलों में ब्लैकबोर्ड के जगह प्रोजेक्टर्स, टीचर के हाथ में चॉक की जगह स्टाइलस डिवाइस और बच्चों के हाथ में पेन पेंसिल की जगह रिमोर्ट कंट्रोल आ गए हैं। ऐसे में इसे विकासशील देश में शिक्षा की नई तस्वीर कहा जा सकता है। कम लागत में ई-क्लास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला व नवाचार हेतु लर्निंग कार्नन बनाने की दिशा मे जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में प्राचार्यों ने कमाल का ऐतिहासिक कार्य करते हुए इन संसाधनों का शिक्षक व छात्रों से अल्पसमय में बेहतर उपयोग कराया गया और शिक्षकों व बच्चों को नवीन ज्ञान से जोड़ दिया। इसी का ही नतीजा हे कि बच्चों मे पठन-पाठन कौशल का विकास हुआ और बोर्ड परीक्षा मे बेहतर परिणामों दिखाई दिए।रायपुर जिले के सकल शासकीय विद्यालयों का परिणाम 2016-17 में 80 प्रतिशत रहा तो वहीं 50 स्मार्ट विद्यालयों का परिणाम 88 प्रतिशत रहा है। न केवल परीक्षा परिणाम में वृद्धि हुई अपितु छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में भी 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बेहतर परिणामों को देखते हुए 2017-18 में समस्त भवन युक्त हायर सेकेण्डरी विद्यालयों को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब हो कि स्मार्ट क्लासेस मे नई तकनीकी के माध्यम से शिक्षा ले रहे छात्राओं की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं। पढ़ाई के इस नए तरीके में बच्चों को हर चीज वीडियो, पिक्चर्स और ग्राफिक्स के जरिए समझाई जाती है। टेस्ट देने के लिए भी हाई-टेक तरीके का इस्तेमाल है। प्रोजक्टर पर प्रश्न दिखते ही छात्र रिमोर्ट के जरिए अपना जवाब देंगे और तुरंत सही, गलत का पता भी चल जाएगा। पढ़ाई का तरीका बदलने वाली ये टेक्नोलॉजी न सिर्फ बच्चों के लिए दिलचस्प है बल्कि टीचर्स के लिए आसान है।

 

शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों का निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिये इस बार जिला कलेक्टर द्वारा प्रायोगिक तौर पर रायपुर मे ऑनलाईन प्रवेश प्रक्रिया अपनाई गई है जो अत्यधिक आसान एवं सुविधाजनक रही है। प्रर्याप्त प्रचार-प्रसार में इस प्रक्रिया को जनजन तक पहुंचाने में सफल रही। डिजिटल छत्तीसगढ़ की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए इस बार पालकों ने स्वयं ऑनलाईन आवेदन किया, इस संबध मे परियोजना अधिकारी व्ही के तिवारी ने बताया की ऑनलाईन प्रक्रिया से नोडल प्राचार्यों व निजी स्कूल के यहां आने जाने से होने वाली मानसिक, शारीरिक क्षति की बचत तो हुई ही वहीं पालक अपने रोजी मजदूरी से भी वंचित नहीं हुए। इस प्रकार आर्थिक क्षति भी नहीं हुई। उन्होने बताया कि प्रर्याप्त प्रचार-प्रसार एवं आसान प्रक्रिया होने के कारण इस बार 4418 बच्चों का प्रवेश विभिन्न स्तरीय निजी विद्यालयों में हुआ। प्रवेश आवेदन के पश्चात् पंजीयन क्रमांक जारी करना, लॉटरी से चयन की सूचना आवेदकों को मोबाईल नम्बर में प्राप्त होना एवं विद्यालयों के द्वारा आसानी से संदेश के माध्यम से ही बच्चों को विद्यालय में प्रवेश देना, पालकों के लिए काफी सुविधाजनक प्रक्रिया साबित हुई। वर्ष 2016-17 में कुल उपलब्ध सीटों की संख्या 6384 के लिए 4108 आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें से 3907 सीटों के बच्चे चयनित हुए, इसकी तुलना में वर्ष 2017-18 में कुल उपलब्ध सीटों की संख्या 9574 के लिए 8940 आवेदन प्राप्त हुए, जिसके लिए 5604 सीटों के लिए बच्चे चयनित हुए, जो गत वर्ष की तुलना में कुल उपलबध सीटों में 49.97 प्रतिशत, प्राप्त आवेदन में 117.62 प्रतिशत तथा चयनित सीटों की संख्या में 43.43 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
बाक्स मे
कलरफूल
अब कक्षाओं को अपनी मनपसंद रंगों से सजाए जाने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी. जिला शिक्षा अधिकारी ए.एन. बंजारा के मुताबिक, एक कक्षा में केवल तीन रंगों का प्रयोग किया जाएगा, इसका चयन छात्रों द्वारा ही किया जाएगा. बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने यह पहल की गई है.

आरटीई
राकेश राठौर, जुता पॉलीस का काम करके जीवन गुजारा करने वाला व्यक्ति, कभी सोचा भी न था कि उसका बेटा आयुष अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय प्लेहाईट स्कूल में अध्ययन करेगा। संजु साहू जो कि नेत्रहीन है, वह भी अपने बच्चे लोकेश को श्री बालाजी विद्यामंदिर देवेन्द्र नगर में प्रवेश लेकर अध्ययन करने से काफी खुश दिख रहा है। इसी तरह से कई अन्य मजदूर, सब्जी वाले, हाथ ठेला चलाने वाले, रिक्शा चलाने वाले के बच्चे आज प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में अध्ययन कर रहें हैं।

स्मार्ट क्लास
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिलतरा, उपरवारा, चंपारन, के बच्चे व शिक्षक बहुत खुश हैं क्योंकि उनके स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम 95 प्रतिशत आया है। भंडारपुरी का तो पूरा गांव पुलकित है क्योंकि उनके यहां 100 प्रतिशत बच्चे उत्तीर्ण हुए हैं। ऐसी स्थिति रायपुर जिले के पचासों स्कूल में है।

अक्सर पालक व बच्चे शासकीय स्कूलों में भौतिक संसाधन की कमी का जिक्र करते हैं। समृद्ध पुस्तकालय, प्रयोगशाला नहीं होता है, बच्चे कुंठित होते हैं। इन्हीं परिदृश्यों के कारण स्मार्ट स्कूल की परिकल्पना की गई।

फोटो स्मार्ट क्लास,स्कूल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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