November 29, 2021
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कमाउ बेटे के मौत के बाद डेढ़ वर्षों मुआवजा के लिये भटक रही बेवा

कमाउ बेटे के मौत के बाद डेढ़ वर्षों मुआवजा के लिये भटक रही बेवा            

हरितछत्तीसगढ़, विवेक तिवारी पत्थलगांव। इकलौते कमाउ बेटे के मौत का दुःख झेल रही विधवा को उसके मुआवजे की राशि नही मिलने के कारण जीवन यापन करने में काफी समस्याओं कासामना करना पड़ रहा है। वहीं गरीब बेबस लाचार महिला का सुननेवाला कोईनहीं है। सारसमार निवासी इस बेवा के बेटे के डेम में डुबकर हुये मौत के बाद मृतक की बिधवा मां को दी जानेवाली मुआवजा राशि के मिलने का इंतजार है।

गौरतलब हो कि कमाउ इकलौते बेटे के की मौत को करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद मुआवजा की राशि नही मिली है। वहीं घटना के बाद मिलने वाली मुआवजा की राषि से मृतक के परिजनों कुछ हद तक मदद मिल जाती है, परन्तु जब बात हो एकगरीब और विधवा महिला कि जहां उसका इकलौता बेटा ही कमाई कर रहा हो, और उसमहिला की तीन बेटियां अभी जीवित हो, ऐसे हालात में आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हैं कि इस विधवा का जीवन यापन करने में कैसी समस्या आती होगी।मुआवजा नही मिलने के कारण शासन द्वारा मुआवजा की राषि नहीं मिलने सेगरीबों के अरमान किस तरह ये दम तोड़ रहे हैं।

       आकस्मिक मौत के बाद मृतक के परिजनों को दी जानेवाली मुआवजा राशि दम तोड़ रही है। गरीब परिवार के वयस्क सदस्य की आकस्मिक मौत के बाद उनके परिजनों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत एक मुश्त मुआवजा राशि का भुगतानप्रशासन के द्वारा किया जाता है। इस योजना के तहत अपने बेटे के मौत होनेके बाद डेढ़ वर्षों से चक्कर काट रही विधवा महिला समारी राठिया ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, राजस्व मंत्री,कमिश्नर सरगुजा, कलेक्टर जशपुर,एसडीएम, एवं तीन सांसद को आवेदन के जरिये अपनी मुआवजा राशि प्रदान करनेकी मांग की है।  आवेदन के जरिये बताया गया है कि किस तरह से कोटवार और पटवारी के जरिये उसे डेढ़ वर्षों से घुमाया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि यहां पदस्थ पटवारी का नंबर तो दिवार पर अंकित है परन्तु फोन न उठाना व हल्का से गायब रहना इनका पेशा बनकर रह गया है।

क्या है मामला

23/03/2016 को समारी राठिया के इकलौते बेटे सुलेष राठिया के डेम में डुबकर मौत हो गई थी। जिसका आज के समय तक उसके मौत का मुआवजा राशिअप्राप्य है। आवेदिका समारी राठिया ने आवेदन के जरिये बताया है कि किस तरह से वहां कोटवार व वहां पदस्थ पटवारी के कारण उसे अभी तक मुआवजा की राशि अप्राप्य है, और किस तरह से उसे चक्कर लगवाया गया है, और उच्चाधिकरियों के पास जाने की बात करने पर उसे रोक दिया जाता था। आवेदिका के द्वारा उच्च अधिकारी एवं जनप्रतिनीधियों को आवेदन भेजकर मुआवजा राशि की मांग की हैं, ताकि उसकी स्वयं एवं तीनों बेटियों को कुछ सहारा मिल सके।

सरकार ने मुआवजा राशि के भुगतान को लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम से जोड़ दिया है, इसके बाद परिवार के सदस्यों की मौत होने पर उनके परिजनों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत गरीब परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान किया जाना है। इसके बाद भी मृतकों के परिजन मुआवजा राशि के लिए प्रशासन की राह देख रहे हैं। इतना ही नहीं, दिन-प्रतिदिन मुआवजा राशि नहीं मिलने से मृतकों के परिजन अपनी जिंदगी के एक -एक दिन फटेहाली के बीच गुजारने को विवश हैं. मुआवजा की राशी नहीं मिलने से मृतक के परिजन काफी परेशान हैं। वहीं अब देखना है कि प्रषासन की नींद कब खुलती है और प्रशासन के द्वारा कब तलक तक इस बेवा के अपने बेटे के मौत का मुआवजा की राशि प्रदान की जाती है।

 —–यदि ऐसा है तो मामले की पुरी जानकारी लेकर, दस्वावेज मंगवाकर संबंधित परिवार को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाया जायेगा।

——–मायानंद चन्द्रा तहसीलदार, पत्थलगांव

1 thought on “कमाउ बेटे के मौत के बाद डेढ़ वर्षों मुआवजा के लिये भटक रही बेवा

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