November 1, 2020
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12 घंटो तक मासूम की डेड बॉडी रखी रहि होस्पिटल प्रबन्धन ,महज 30 हजार के लिए बच्चे का शव बना बंधक.. प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद परिजनों को अस्पताल प्रबंधन ने सौंपा बच्चे का शव…

12 घंटो तक मासूम की डेड बॉडी रखी रहि होस्पिटल प्रबन्धन ,महज 30 हजार के लिए बच्चे का शव बना बंधक.. प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद परिजनों को अस्पताल प्रबंधन ने सौंपा बच्चे का शव…

एक 8 साल के मासूम के शव को महज 30 हजार रुपए के लिए दिनभर बंधक बनाकर अस्पताल में रख लिया गया। जब इस बात की जानकारी प्रशासन को हुई तो एसडीएम के निर्देश पर देर रात शव को अस्पताल के कब्जे से मुक्त कराया गया।

इस संबंध में जो जानकारी आ रही है वह सारंगढ़ से है। यहां सारंगढ़ से बिलासपुर मार्ग पर राधा कृष्ण अस्पताल स्थित है। इस अस्पताल में सारंगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम जशपुर निवासी 8 साल के मासूम भूरु राम सारथी को उसके पेट एवं सीने में दर्द होने की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था । जहां उसे आईसीयू में रखकर इलाज किया गया एवं 4 दिन बाद जनरल वार्ड में यह कह कर शिफ्ट कर दिया गया कि वह अब पूरी तरह से स्वस्थ है। अस्पताल प्रबंधन ने ₹48000 जमा कर बच्चे को घर ले जाने की सलाह दे दी। लेकिन, आर्थिक रूप से कमजोर परिजनों की ओर से रुपए इंतजाम के काफी प्रयास के बावजूद भी इस रकम की व्यवस्था नहीं हो सकी । तभी लगभग 2 बजे बच्चे की मौत हो गई।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि डेड बॉडी को 48000 रुपए दिए बिना वह नहीं ले जा सकते। उन्होंने किसी प्रकार ₹10000 का इंतजाम किया और उसे अस्पताल में जमा करते हुए शेष रकम बाद में देने की मिन्नत की लेकिन , अस्पताल प्रबंधन नहीं माना और पूरे रुपए जमा करने के बाद ही शव को घर ले जाने की बात पर अड़ा रहा। बच्चे की मौत होने के बाद परिजन व्याकुल होकर इधर-उधर भटकते रहे बावजूद इसके रुपए का इंतजाम नहीं हो रहा था। शव को बंधक बनाए जाने की खबर जब स्थानीय प्रशासन को मीडिया के जरिए मिली तो एसडीएम नंद कुमार चौबे ने तहसीलदार और बीएमओ को अस्पताल भेजा । जहां प्रशासनिक अमले ने अस्पताल प्रबंधन को इस बात की समझाइश दी की परिवार अत्यंत गरीब है ऐसे में वह अपना सामाजिक दायित्व भी निभाए। प्रशासनिक समझाइस के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कुछ दिनों की मोहलत दे कर देर रात बच्चे को लेजाने की अनुमति दी। मृतक के परिजनों ने बताया कि अस्पताल की ओर से रुपयों के अभाव में बच्चे का ठीक सेेेे इलाज भी नहीं किया गया इसलिए उसकी मौत हो गई । वही ₹48000 का बिल बनाया गया था जिसमें 8000 डिस्काउंट किया गया था और ₹10000 उन्होंने व्यवस्था करके अस्पताल में जमा करा दिया था शेष ₹30000 का इंतजाम नहीं हो पाया था।

क्या कहता है अस्पताल प्रबंधन

अस्पताल प्रबंधन की ओर से डीडी साहू ने बताया कि बच्चे को बंधक नहीं बनाया गया था । यह आरोप झूठे हैं । बच्चे को झटके आने की बीमारी थी। इलाज के बाद उसे स्वस्थ कर दिया गया। लेकिन दोपहर में जब उसकी मां खाना खिला रही थी तो एक बार फिर उसे झटका आया और वह स्पिल्ट कर गया। जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन रुपयों का इंतजाम करने गए हुए थे। देर रात उनके पहचान वाले और प्रशासन की टीम आई थी तो पैसे देने की उनकी गारंटी पर बच्चे के शव को मुक्त कर दिया गया है।

क्या कहते हैं सारंगढ़ के बीएमओ

इस संबंध में जब हमने सारंगढ़ के बीएमओ घृतलहरे से बात की तो उन्होंने बताया कि एसडीएम सारंगढ़ को इस बात की सूचना मिली थी और उनके निर्देश पर प्रशासन की टीम और मैं स्वयं अस्पताल गया था। वहां अस्पताल प्रबंधन को समझाइश देते हुए और सामाजिक दायित्व निर्वहन करते हुए बच्चे के शव को उनके परिजनों के हवाले करने की बात कही गई। जिस पर अस्पताल प्रबंधन सहमत हो गया।

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