December 4, 2020
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सहायक शिक्षक के सबसे बड़े दुश्मन…संजय शर्मा टीचर्स एसोसिएशन, कभी नहीं चाहते वेतन विसंगति का निराकरण….सहायक शिक्षक इनके लिए सिर्फ चंदाखोरी और भीड़ बढ़ाने वाला….हमारा आंदोलन और चर्चा गलत तो क्यो देने आए समर्थन और लूटी वाहवाही….आखिर कैसे कह रहे हैं – वेतन विसंगति का मुद्दा हो गया खत्म* ??? :फेडरेशन

*सहायक शिक्षक के सबसे बड़े दुश्मन…संजय शर्मा टीचर्स एसोसिएशन, कभी नहीं चाहते वेतन विसंगति का निराकरण….सहायक शिक्षक इनके लिए सिर्फ चंदाखोरी और भीड़ बढ़ाने वाला….हमारा आंदोलन और चर्चा गलत तो क्यो देने आए समर्थन और लूटी वाहवाही….आखिर कैसे कह रहे हैं – वेतन विसंगति का मुद्दा हो गया खत्म* ??? :फेडरेशन

फेडरेशन अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में 22 सालों से केवल निजी लाभ की नेतागिरी करने वाले और सहायक शिक्षको के अन्याय जिम्मेदार संजय शर्मा टीचर्स एसोसिएशन वास्तव में चाहते ही नहीं है की सहायक शिक्षकों का वेतन विसंगति का मुद्दा ऊंचाई पर पहुंचे और उनका हक मिले। क्योंकि इस पूरी समस्या के जनक ही संजय शर्मा टीचर्स एसोसिएशन है जिन्होंने हमेशा सहायक शिक्षकों के खिलाफ काम किया है और हमेशा उनके हकों पर डाका डाला है। उनके लिए वर्ग 3 केवल भीड़ बढ़ाने और चंदाखोरी का जरिया मात्र है और यही वजह है कि 22 सालों में उन्होंने सहायक शिक्षक के लिए ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिससे सहायक शिक्षक उन पर विश्वास करे और अब जब सहायक शिक्षकों ने अपना खुद का संगठन सहायक शिक्षक फेडरेशन प्रजातांत्रिक रूप से खड़ा कर लिया है तो उनसे यह देखा नहीं जा रहा है और अपने कलुषित मानसिकता से बार-बार शासन प्रशासन को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वेतन विसंगति का मुद्दा खत्म हो गया है और इस पर चर्चा न की जाए। यह समझ से परे है कि आखिर सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति के मुद्दे पर चर्चा हो रही है तो इनके पेट में दर्द क्यों हो रहा है ? यह वही इंसान है जिसका वह ऑडियो और इनके चापलूसो का स्क्रीनशाट सार्वजनिक है जिसमे वर्ग 3 को आखिर और कितना वेतन मिलेगा, अब हम कोई आंदोलन नही करेंगे, अपनी समस्या का खुद हल करें आदि। यही वह इंसान है जिसने कई बार आंदोलन को बेचा है और आधी रात को शिक्षाकर्मियों के सपनों को बेचकर रातोंरात हड़तालों को समाप्त किया है। जिसने बार-बार शिक्षाकर्मियों की कीमत लगाकर अपनी कीमत बढ़ाई है। कर्मचारी संघ के इतिहास में जिसको घपलेबाजी का नोटिस मिला है, जिसका जवाब व हिसाब आज तक नही दे पाया ।*
*27 अक्टूबर को डीपीआई ने केवल सहायक शिक्षक फेडरेशन को चर्चा के लिए आमंत्रित किया था तो इसने चालाकी करते हुए, काम बिगाड़ने के लिए बिन बुलाए अपने पदाधिकारी को जबरदस्ती चर्चा करने भेज दिया था। इसके बाद फेडरेशन के पदाधिकारियों की देर रात स्कूल शिक्षा सचिव से भी चर्चा हुई है और उसके बाद 29 को लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों से चर्चा हुई है जिसमें सभी तथ्यात्मक दस्तावेज अधिकारियों को सौपे गए हैं ताकि सहायक शिक्षकों के हित में शीघ्र निर्णय हो , ऐसे समय में जब सहायक शिक्षकों के लिए संभावनाएं बन रही है तो इसको पच नही रहा हैं और मीडिया में जानबूझकर अनर्गल बाते प्रचारित कर रहा है। मैं पूछना चाहता हु यदि हमारे चर्चा और आंदोलन इतना ही गलत था तो अपने पदाधिकारियों को समर्थन के लिए क्यो भेजा? और उस समर्थन पर वाहवाही लूटने में पीछ नही रहा ये बेशरम। संजय शर्मा बताए “चालाकी से वेतन विसंगति का मुद्दा खत्म” … आख़िर यह चालाकी कौन कर रहा है, और मुद्दा कैसे खत्म हुआ । प्रदेश में और अन्य संगठन है लेकिन किसी ने ऐसी दुर्भावना कभी नहीं दिखाई है जैसी संजय शर्मा और उनके चापलूस सहायक शिक्षक के खिलाफ लगातार दिखा रहे है। सहायक शिक्षक अपने अधिकार के लिए सजग हैं। अब किसी के झांसे में नहीं आने वाला। अपनी लड़ाई खुद अपने सहायक शिक्षक से ही नेता बनाकर लड़ेगा। वही संजय शर्मा और उनके चापलूसों को मुंहतोड़ जवाब देकर इनके खुरापात इरादों को शासन प्रशासन, शिक्षक समुदाय के बीच लगातार उजागर करके, इनके मुह में कालिक पोतेगा।*
*संजय शर्मा और उनके चापलूसों को चुनौती देता हूं दम हैं तो फेडरेशन की तरह प्रजातांत्रिक रूप से पंजीयन कार्यालय की देखरेख में अपने प्रांताध्यक्ष का चुनाव कराकर दिखाए, स्वम्भू बड़ा नेता बनने का बखान न करे। चुनौती हैं कि पंजीयन कार्यलय के नोटिस का जवाब देकर अभी तक के चंदाखोरी का हिसाब सार्वजनिक करें। क्योंकि हम सबने चंदा दिया हैं और हमे जानने का पूरा अधिकार है।*

अपील :- *मेरी सभी सहायक शिक्षकों से अपील है कि आप चाहे किसी भी संगठन में हो लेकिन संजय शर्मा और उनकी टीम के काले चेहरे को अवश्य उजागर करें और इस मैसेज को प्रदेश के कोने-कोने में शेयर करें यह वास्तव में आपकी लड़ाई है क्योंकि अन्य संगठन जहां सहायक शिक्षकों के हित के लिए एक साथ हैं और कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं वहीं संजय शर्मा और उनकी टीम लगातार सहायक शिक्षकों के खिलाफ है*।

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