July 25, 2021
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रायपुर के युवा शायर नदीम मेमन का हुआ सम्मान मुशायरों की श्रृंखला कारवाँ-ए-सुख़न सफलतापूर्वक संपन्न 

रायपुर के युवा शायर नदीम मेमन का हुआ सम्मान

मुशायरों की श्रृंखला कारवाँ-ए-सुख़न सफलतापूर्वक संपन्न 

छत्तीसगढ़ राज्य उर्दू अकादमी द्वारा उपाध्यक्ष नज़मा अज़ीम खान के अथक प्रयासों से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला के द्वितीय सोपान के रूप में पाँच दिवसीय कारवाँ-ए-सुख़न कार्यक्रम का कल रायपुर यादगार समापन हुआ.

गौरतलब है कि प्रदेश के लोकप्रिय युवा शायर और साहित्यकार नदीम मेमन और आशीष राज सिंघानिया के नेतृत्व में सफ़र विथ उर्दू के बाद अब कारवाँ-ए-सुख़न ने भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर उर्दू ज़बाँ की बेहतरी के अलावा क़ौमी एकता का अनूठा पैग़ाम देने में भी जबरदस्त सफ़लता हासिल की. सरायपाली, धरमजयगढ़, अम्बिकापुर, कांसाबेल व कोरबा क्षेत्र में लगातार अदबी मुशायरे, सम्मान कार्यक्रम व अल्पसंख्यक कल्याण हेतु दौरा व बैठकों का एक पूरा सिलसिला चला.

युवा शायर व साहित्यकार नदीम मेमन के साथ प्रदेश के कई वरिष्ठ व युवा शायरों ने भी अपने जलवे बिखेरे, जिनमें कोरिया में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दशरथ सिंह राजपूत, आशीष राज सिंघानिया,रायपुर के वरिष्ठ दोहाकार राजेश जैन राही, राजनांदगाँव के हास्य कवि मनोज शुक्ला, गोंदिया से आयी कवयित्री सरिता सरोज, युवा  इरफ़ान खान सहित स्थानीय कवियों के रूप में दिनेश दिव्य, श्याम कश्यप, साजिद अली साजिद, राजेश पाण्डेय, आयेशा खान, शिरीन खान, दिलीप अग्रवाल, मुकेश चतुर्वेदी, वीणा मिस्त्री आदि ने अलग-अलग स्थानों में अपनी-अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां दी.

पूरे कार्यक्रम के दौरान सरायपाली में संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी, क्रेडा अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा, विधायक रामलाल चौहान, धरमजयगढ़ में पूर्व संसदीय सचिव ओमप्रकाश राठिया, अम्बिकापुर में सरगुजा सांसद कमलभान सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर अनिल सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अखिलेश सोनी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की.

सभी कार्यक्रमों में स्थानीय आयोजकों ने सम्मानिय अतिथियों व शायरों का गर्मजोशी से स्वागत किया व अकादमी की उपाध्यक्ष नज़मा अज़ीम खान ने सभी को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया. हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने कविताओं व ग़ज़लों का आनंद लिया और विशेष रूप से युवा शायर आशीष तन्हा के कौमी एकता के तराने मेरा हिंदुस्तान है ने पूरे सफर के हर पड़ाव में गंगा जमुनी तहजीब व वतनपरस्ती का एक नया परचम लहराया. समस्त जगहों पर लोगों ने ऐसे अद्वितीय आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंषा की व पुनः इस तरह के अनूठे कार्यक्रमों के आयोजन हेतु अपना उत्साह व्यक्त किया.

 नफरत की दीवार गिरा दे या अल्लाह

सब धर्मो के भेद मिट दे या अल्लाह

ख्याब जो देखे नदीम,आशीष गांधी ने

ऎसा हिन्दुस्तान बना दे या अल्लाह -नदीम मेमन

 

जो तुझे याद भी करता हूँ तो घबराता हूँ

बीते हालात की यादों से सिहर जाता हूँ

जिसे इक नज़र मुझे देखना गँवारा नहीं

देखने मैं तो उसे शाम-ओ-सहर जाता हूँ – आशीष सिंघानिया 

हिन्दी ने मुझको दिया,लिखने का विश्वास,

  उर्दू की नजरें करम,घुलने लगी मिठास।

मुश्किल में आकर मिली ,हिन्दी हुई हबीब,

  उर्दू से मुझको मिली,कहने की तहजीब – राजेश जैन ‘राही’

इमारतों को ये मजदूर गढ़ा करते है

ये छोटे लोग ही शहरों को बड़ा करते है,

तुझको देखा ही नही फिर भी न जाने कैसे,

लोग तुझको मेरी आँखों में पढ़ा करते है। मो. इरफ़ान

ज़ेहन में जब भी जन्नत की बात आती है,

चूम लेती हूँ कदमों को जब माँ पास होती हैं।

हर तरफ डर का ही वातावरण है,

गुम गए हैं राम रावण अवतरण है। आयशा अहमद खान

सर छुपाने का ठिकाना चाहिए

धुप को भी शामियाना चाहिए

डाल दें अपने तरफ भी एक नजर

तब किसी को आजमाना चाहिए | सरिता सरोज* 

 

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