December 4, 2021
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जशपुर,जिले में शिक्षाकर्मी आंदोलन हुआ तेज,आमजन जनप्रतिनिधियों से माँगा गया समर्थन

जिले में शिक्षाकर्मियों का आंदोलन हुआ तेज

आमजन और जनप्रतिनिधियों से माँगा गया समर्थन

बर्खास्तगी आदेश की शिक्षाकर्मियों ने की निंदा

शिक्षाकर्मी बोले,हम नहीं डरेंगे सरकारी आदेश से

हरितछत्तीसगढ़ जशपुर:-

✍शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के एकजुट बैनर तले प्रदेश सहित जिले के आठों ब्लॉक मुख्यालय में विगत 20 नवंबर से जारी अनिश्चितकालीन आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपने प्रयासों को गति देते हुए शिक्षक मोर्चा के जिला संचालक अनिल श्रीवास्तव, संतोष टाण्डे,एवं विनय सिंह की टीम ने सभी ब्लॉकों में धरनारत शिक्षाकर्मियों के बीच उपस्थित होकर उत्साहवर्धन किया।  धरनारत शिक्षकों को संबोधित करते हुए जिला संचालक अनिल श्रीवास्तव व संतोष टांडे ने संयुक्त रूप से कहा कि अब आश्वासन व कमेटी से नहीं बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय लेने से ही बात बनेगी। प्रदेश सरकार व शासन ने कई बार आश्वासन दिया है, लेकिन आश्वासन केवल कोरे आश्वासन ही साबित हुए हैं,क्योंकि उन पर अमल नहीं किया गया। पंचायत शिक्षकों की मांगों पर सुझाव देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद 20 से अधिक कमेटियां बनाई गई। कई कमेटी ने रिपोर्ट ही नहीं दिया तो कुछ कमेटियों ने नकारात्मक सुझाव दिया ।एक आध कमेटियों ने कुछ ठीक सुझाव दिया तो उन सुझावों पर भी कटौती करने के लिए कमेटी के ऊपर कमेटी बना दी गई।ये पूरे प्रदेश के 1 लाख 80 हजार शिक्षाकर्मियों के साथ धोखा नहीं तो और क्या है?

     प्रांतीय सह संचालक एवं जिला संचालकों ने जिले के सभी शिक्षाकर्मियों से इस निर्णायक आंदोलन में प्रतिदिन धरना स्थल पर सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

      आमजन और जनप्रतिनिधियों से माँगा गया समर्थन:-

           आंदोलन के पांचवे दिन जिले के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में बीजेपी के 2003 और 2008 के संकल्प पत्र एवं 2003 में बीजेपी नेता अजय चंद्राकर द्वारा लिखा गया अनुशंसा पत्र को आम जनता के बीच जाकर वितरण किया गया, और उनसे समर्थन लिया गया।

               शिक्षक मोर्चा के  पदाधिकारियों ने धरने पर बैठे सभी पंचायत शिक्षकों से कहा है कि आंदोलन के दौरान वे किसी भी प्रकार के नोटिस को ना लें, सरकार व शासन मांगों को पूर्ण करने की वजह अधिकारियों का दुरुपयोग करते हुए अब डराने धमकाने का हथकंडा अपनाने लगी है। इसमें कोई भी शिक्षक नहीं डरें और ना ही भ्रमित हो ।

              मोर्चे के प्रांतीय सहसंचालक लीलाधर बंजारा व अर्जुन रत्नाकर ने कहा कि सन 2003 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में डॉक्टर रमन सिंह ने कवर्धा जनपद पंचायत के पास संविलियन की मांग को लेकर धरनारत शिक्षाकर्मियों के बीच उपस्थित होकर समर्थन देते हुए कहा था कि उनकी सरकार बनने पर संविलियन की मांग पूरी की जाएगी । वहीं 2 दिसंबर 2007 को राजधानी रायपुर में 50 हजार शिक्षाकर्मियों से खचाखच भरे सुभाष स्टेडियम में आयोजित शिक्षाकर्मियों के प्रांतीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि की आसंदी से मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग व आदिम जाति कल्याण विभाग के पदों को पुनर्जीवित करते हुए प्रत्येक वर्ष 20-20 प्रतिशत शिक्षाकर्मियों का संविलियन करने की सार्वजनिक घोषणा की थी। पर आज तक नतीजा सिफर रहा। यदि इस पर भी अमल किया गया होता तो अब तक सभी शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो जाता ।और आज हमें यह समस्या का सामना नहीं करना पड़ता

अनुकंपा नियुक्ति भी नसीब नहीं:

अनुकंपा नियुक्ति में 12वीं के बाद भी टेट व डीएड के अनिवार्य योग्यता के कड़े नियमों के कारण विगत 5 वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति नहीं हो पा रही है ।संघ द्वारा टेट व डीएड की बाध्यता को हटाने तथा ग्रामीण परिवेश को दृष्टिगत रखते हुए कम योग्यता वाले आश्रित परिजनों को भी चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति देने की मांग की गई थी। जिसके बाद पंचायत सचिव के पद पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया गया,लेकिन मात्र छह माह बाद इस आदेश को भी वापस ले लिया गया। जिसके बाद से अब अनुकंपा नियुक्ति के रास्ते बंद हो गए। सरकार की गलत नीतियों के कारण जिले में वर्तमान में 25 से अधिक मृत शिक्षकों के परिजन आज भी अनुकम्पा नियुक्ति पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं।

         जिला मीडिया प्रभारी मो. अफरोज खान व सैयद सरवर हुसैन ने बताया कि 23 नवंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में यह साफ हो गया कि सरकार हमारी मांगों को लेकर कितनी उदासीन है। इससे सभी शिक्षाकर्मी में भारी आक्रोश देखा जा रहा है । साथ ही हड़ताली शिक्षाकर्मियों से कड़ाई से निपटने के संबंध में आनन फानन में आदेश जारी किए जा रहे हैं लेकिन यह दाव भी उल्टा पड़ता दिख रहा है। आंदोलन की ज्वाला अब और भड़क उठी है,आलम यह है कि हड़ताल के नाम पर अभी तक घर में आराम फरमा रहे,सैर सपाटा कर रहे और विरोधी संगठनों के सदस्य व समर्थक होने का दावा कर रहे शिक्षाकर्मी भी अब पंडालों की ओर लौटने लगे हैं । इससे हड़ताली शिक्षाकर्मियों का उत्साह और भी बढ़ा हुआ नजर आ रहा है । धीरे धीरे ही सही पर अब आम जनता भी समझ रही है कि वाकई शिक्षाकर्मियों के साथ आज तक गलत होता आया है, और इस बार उन्हें न्याय मिलना चाहिए ।समाज के हर तबके व विभिन्न कर्मचारी संगठनों से मिल रहा खुले-आम समर्थन इसका जीवन्त प्रमाण है।

         जशपुर ब्लॉक संचालक गोविन्द मिश्रा ने कहा कि जो शिक्षक अपने हक़ की लड़ाई से भाग रहे है, अपने साथियों की 20 साल पुरानी मांग के साथ नही है। उन्हें शिक्षक पंचायत कहलाने का कोई हक नही है, आंदोलन से भागने वाले और अपनी लड़ाई कमज़ोर करने वाले  शिक्षक हमारी भावनाओ से खिलवाड़ कर रहे है। इन्हें शिक्षक पंचायत समुदाय कभी माफ नही करेगा।

 

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