January 27, 2021
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राजेन्द्र पाण्डेय को दहेज प्रथा मुक्त भारत के राष्ट्रीय सचिव एवम छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी मनोनीत किया गया

हरितछत्तीसगढ़-विवेक तिवारी, पत्थलगांव

राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार द्वारा मनोनित संगठन दहेज प्रथा मुक्त भारत के संथापक पंडित चरण वशिष्ठ,राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शरद गुप्ता द्वारा श्री राजेन्द्र कुमार पाण्डेय आत्मज स्व.श्री वॉय.पी.पाण्डेय को राष्ट्रीय सचिव और छत्तीसगढ़ राज्य प्रभारी मनोनीत किया गया।
राजेन्द्र कुमार पाण्डेय इसके पूर्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,विद्या भारती,सेवा भारती,अखिल विश्व ब्राह्मण हिंदुत्व शक्ति मोर्चा,राष्ट्रीय हिन्दू महासंघ,जयश्री फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जुड़कर समाज सेवा में अपनी सेवा दे रहे हैं। उनके इस सफलत पर सबन्धियों,मित्रों और क्षेत्र में हर्ष व्याप्त है।
दहेज मूल रूप से शादी के दौरान दुल्हन के परिवार द्वारा दूल्हे के परिवार को दिए नकदी, आभूषण, फर्नीचर, संपत्ति और अन्य कीमती वस्तुओं आदि की इस प्रणाली को दहेज प्रणाली कहा जाता है। यह सदियों से भारत में प्रचलित है। दहेज प्रणाली समाज में प्रचलित बुराइयों में से एक है।
दहेज प्रथा सदियों से चलती आई एक विधि है जो की बदलते वक़्त के साथ और भी गहरा होने लगा है| ये प्रथा पहले के जमाने में केवल राजा महाराजाओं के वंशों तक ही सिमित था| लेकिन जैसे जैसे वक़्त गुजरता गया, इसकी जड़ें धीरे धीरे समाज के हर वर्ग में फैलने लगा| आज के दिन हमारे देश के प्रयात: परिवार में दहेज प्रथा की विधि को निभाया जाता है|दहेज प्रथा लालच का नया उग्र-रूप है जो की एक दुल्हन की जिंदगी की वैवाहिक, सामाजिक, निजी, शारीरिक, और मानसिक क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव डालता है, जो की कभी कभी बड़े दर्दनाक परिणाम लाता है|

दहेज प्रथा की परिणाम के बारे में सोच कर हर किसी का रूह काँपने लगता है, क्यूंकि इतिहास ने दहेज प्रथा से तड़पती दुल्हनों की एक बड़ी लिस्ट बना रखी है| ये प्रथा एक लड़की की सारी सपनो और अरमानो को चूर चूर कर देता है जो की बड़ी ही दर्दनाक परिणाम लाता है |लगभग देश की हर कोने में ये प्रथा को आज भी बड़े ही बेजिजक निभाया जाता है|ये प्रथा केवल अमीरों तक ही सिमित नहीं है, बल्कि ये अब मध्य बर्गियों और गरीबों का भी सरदर्द बन बैठा है|सोचने की बात है की देश में बढती तरक्की दहेज प्रथा को निगलने में कहाँ चूक जाती है? ऊँच शिक्षा और सामाजिक कार्यकर्मों के बावजूद दहेज प्रथा अपना नंगा नाच आज भी पूरी देश में कर रही है| ये प्रथा हर भारतीयों के लिए सच में एक गंभीर चर्चा बन गयी है जो की हमारे बहु बेटियों पर एक बड़ी ही मुसीबत बन गयी है|आधुनिक परिपेक्ष्य में ई-विवाह , पुरुष प्रधान समाज होना, समाज में झूठा दिखावा करना, लड़कीं की सुंदरता या कोई कमी ऐसे कई कारणों से दहेज प्रथा को बल मिलता है। इस प्रथा के कारण समाज में महिलाओं के प्रति अन्याय,अत्याचार,शोषण,हत्या,तलाक जैसे जघन्य अपराध होते हैं। हम संगठन के माध्यम से समाज को जागरूक बनाने का कार्य करते हुए दहेज प्रथा को मूलतः समाप्त करने का प्रयास किया जावेगा।

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