January 20, 2022
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अंतराष्ट्रीय दिवसः महिलाओं पर अत्यचार खत्म करने के लिए’’किसी को पीछे मत छोड़ो’’

अंतराष्ट्रीय दिवसः महिलाओं पर अत्यचार खत्म करने के लिए 

’’किसी को पीछे मत छोड़ो’’

25 नवम्बर को महिलाओं पर अत्याचार खत्म करने के लिए अंतराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 25 नवम्बर से 10 दिसम्बर-मानव अधिकार दिवस तक के 16 दिनों को  महिलाओं पर हिंसा समाप्त करने के सक्रियातावाद काल की तरह मनाया जाता है। 2017 का उद्देष्य है, ’’किसी को पीछे मत छोड़ोःमहिलाओं और लड़कियों पर हिंसा खत्म करो।’’

संयुक्त राष्ट्रसंघ के रिपोर्ट के अनुसार हर तीन में से एक महिला और लड़की अपने जीवन में हिंसा का शिकार होती है। विष्व में 35 प्रतिषत महिलाएं और लड़कियां शारीरिक और यौन रूप से उत्पीड़ित होती हैं। कुछ देषों में यह प्रतिशत अधिक है। नारी हिंसा हर देश और समाज में घटित होती है। हर घर, शिक्षण संस्थाओं, गलियों, कार्य स्थलों, शरणार्थी शिविरों और इनटरनेट में यह घटित होती है। बहुधा यह सामान्य बना दी जाती है और सजा से बचा दी जाती है। जहाॅ भी यह घटित होती हो, चाहे कोई भी प्रकार की हो, जिसे भी प्रभावित करती हो, इसे तत्काल रोकना है। धारणीय विकास लक्ष्य का वादा, ’’किसी को पीछे मत छोड़ो’’, महिलाओं पर हिंसा खत्म किए बिना पूरा नहीं हो सकता।

इतिहासः 25 नवम्बर को नारी अत्यचार खत्म दिवस के रूप में मनाने का इतिहास इस प्रकार है। सन् 1960 में तीन मिराबल बहनों (पट्रिया मर्सेडेस मिराबल, मरिया अर्जेनटिना मिनेरभा मिराबल और अन्टोनिया मरिया तेरेसा मिराबल) की दोमिनिकन गणराज्य में छलाघत हुई। वहाॅ के तानाषाह रफाएल ट्रुजिलो ( त्ंंिमस ज्तनरपससवए 1930-1961) ने उनकी हत्या का आदेश दिया था, क्योंकि वे उसकी तानाशाही का विरोध करीे थीं। सन् 1981 मंें लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई नारीवादी सम्मेलनों ने 25 नवम्बर को रेखांकित किया नारियों पर अत्यचार के विरूद्ध संघर्ष करने और जागृति लाने के लिए। दिसम्बर 17, 1999 को संयुक्त राष्ट्रसंघ ने इस तिथि को उक्त उद्देष्य के लिए आधिकारिक घोषणा की। तब से यह दिवस मनाया जाने लगा।

इस दिवस पर संयुक्त राष्ट्रसंघ की महिला कार्यकारी निर्देषिका फुमजिल म्लाबो ने अपने संदेश मे कहा कि नारियों पर हिंस्सा अपरिहार्य नहीं है, हिंस्सा रोकने के कई तरीके हैं। पहला, हिंस्सा चक्र को बार-बार घटित होने से रोकना। आगे उन्होंने कहा इस वर्ष के उद्देष्य के केन्द्र बिन्दु ’’किसी को पीछे नहीं छोड़ना’’ का अर्थ है किसी को बाहर नहीं छोड़ना। कहने का तात्पर्य है, नारियों को बराबरी में लाना-उनमें जो उनसे संबंधित हैं, और हिंसा समाप्त करने की योजना उनके साथ बनाना जो बहिस्कृत थीं। एक वैष्विक समुदास के रूप में नारी हिंसा को हम खत्म कर सकते हैं, भेदभाव समाप्त करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं, मानव अधिकार व सम्मान को पुनःस्थापित कर सकते हैं और किसी का पीछे नहीं छोड़े सकते हैं। 

नारी हिंसा शारीरिक, यौन और मनावैज्ञानिक रूपों मंे प्रकट होती है। अपने अंतरंग साथी द्वारा हिंसा, यौन हिंसा व उत्पीड़न, मानव तस्करी, महिला जननांग अंगभंग, बाल विवाह, अष्लील मेसेज, तिरस्कार व भेदभवपूर्ण व्यवहार, ये भी नारी हिंसा के प्रकार हैं।

यह दिवस हमें लैंगिक भेदभव को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने का संदेष देता है। नारी हिंसा खत्म करके न्याय और बराबरी का वातावरण निर्मित करने का संकेत करता है। समाज में नारी सम्मान स्थापित करने के लिए जागृति कार्यक्रम करने का एक अवसर प्रदान करता है। मनुष्य को हिंसक से अहिंसक बनने का एक मौका देता है। चिंतन करने और सुधार लाने अहवान करता है।

याकूब कुजूर संयोजक

जीवन विकास मैत्री, 

पत्थलगाॅव

 

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