August 5, 2021
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कुत्ते ने काटा, जड़ी-बूटी व झाड़-फूंक से कराया इलाज मौत,जशपुर जिले में अंधविश्वास की जड़े मजबूत

कुत्ते ने काटा, जड़ी-बूटी व झाड़-फूंक से कराया इलाज मौत,जशपुर जिले में अंधविश्वास की जड़े मजबूत

हरितछत्तीसगढ़ विवेक तिवारी/संजय तिवारी।।

शासन के तमाम दावों के बावजूद अंधविश्वास की जड़ें आज भी ग्रामीण अंचल पर मजबूती के साथ कायम है यही वजह है कि बेहतर स्वास्थ सुविधा के बावजूद लोग झाड़-फूंक और जड़ी बूटी के सहारे ही अपनी जीवन नैया पार करने की जुगत में रहते हैं और बेसमय काल का ग्रास बनकर अंधविश्वास से जुड़े मामले में मौत का आंकड़ा को बढ़ाते नजर आ रहे हैं इसी तरह के एक हादसे में जशपुर पत्थलगांव क्षेत्र के ग्राम खरकट्टा में पालतू कुत्ते के नाखून से खरोंच लगने पर एक महिला को झाड़ फूंक और जड़ी बूटी का सहारा लेना उस समय महंगा पड़ गया जब उसकी सांसे थम गई। कुत्ते के नाखून से लगे खरोंच वाले जख्म का इलाज कराने के बदले झाड़-फूंक व जड़ी बूटी के चक्कर में समय बीता दिए। जिसके कारण जहर उसके शरीर में काफी फैल गया और वह मौत का शिकार बन गयी। इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक 2 दिन पूर्व खरकट्टा ग्राम पंचायत निवासी तिहारो बाई पति सुकलु राम उम्र 50 वर्ष को घर के पालतू कुत्ते ने नाखून से हाथ में खरोच लगा दिया मामूली जख्म को राहत दिलाने उसने गांव के ही एक बैगा के पास जाकर जख्म दिखाया और कुत्ते के काटने का अंदेशा जताया बैगा ने उसे किसी भी प्रकार का उपचार से बचने की सलाह देते हुवे जड़ी बूटी का लेप लगा दिया और झाड़ फूँक करने की जुगत में जुट गया, जंगली जड़ी बूटी ने मामूली जख्म को नासूर बना दिया इतना होने के बाद भी पीड़ित ने स्वास्थ्य केंद्र जाने की जहमत नही उठाई वरन बैगा के झाड़फूंक उपचार पर ही विश्वास जताते हुवे लेप और टोटके पे यकीन रखा बीती रात उसकी हालत काफी खराब होने पर उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल लाया गया जहां चिकित्सको ने उपचार के दौरान पाया कि जहरीली जड़ी बूटी ने जख्म के रास्ते पूरे शरीर पर प्रभाव करते हुवे सांसे धीमी कर दी और इलाज के दौरान गम्भीर हालत उखड़ती सांसे की वजह से उसे बाहर रेफर किये जाने की तैयारी के दौरान उसकी सांसे थम गई। 

आज के दौर में भी झाड़ फूँक

एक ओर जहां इंसान चांद पर घर बसाने के सपने देख रहा है, वहीं दूसरी ओर झारखंड के अति पिछड़े जिलों में शामिल पश्चिम सिंहभूम के लोग आज भी अंधविश्वास के घेरे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। पिछले कई वर्षो से अंधविश्वास से जुड़े मामले समाचार पत्रों में सुर्खियों में हैं। बावजूद इसके जशपुर जिले के ग्रामीण अंचलों के लोग इस बुराई से बाहर नहीं निकल पा रहा है और अपनों का जीवन खतरे में डाल रहा है। 

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