July 26, 2021
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भारत के सहयोग से बने ईरान के चाबहार बंदरगाह का हुआ उद्घाटन, पाकिस्तान चीन को जवाब

भारत के सहयोग से बने ईरान के चाबहार बंदरगाह का हुआ उद्घाटन, पाकिस्तान चीन को जवाब

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने आज देश के दक्षिणी तट पर स्थित रणनीतिक महत्व के चाबहार बंदरगाह पर नव निर्मित विस्तार क्षेत्र का उद्घाटन किया।ओमान की खाड़ी के इस बंदरगाह की मदद से भारत अब पाकिस्तान का रास्ता बचा कर ईरान और अफगानिस्तान के साथ एक आसान और नया व्यापारिक मार्ग अपना सकता है। ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत तट का यह बंदरगाह भारत के पश्चिमी तट से नजदीक है और आसानी से संपर्क के योग्य है।

इसे पाकिस्तान में चीनी निवेश से बन रहे गवादर बंदरगाह का जवाब माना जा रहा है। पाकिस्तान का गवादर बंदरगाह चाबहार से महज 80 किलोमीटर पश्चिम में है।

नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व पोत परिवहन राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन ने किया। शाहिद बहेश्ती बंदरगाह के नाम से जाने जाने वाले इस बंदरगाह के उद्घाटन कार्यक्रम में कई देशों के राजदूत और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ईरान के सरकारी टीवी ने कहा कि इस समारोह में भारत, कतर, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और कई अन्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। राष्ट्रपति रूहानी के कार्यालय के अनुसार, उन्होंने उद्घाटन समारोह में कहा, ‘‘क्षेत्रीय मार्गों पर भूमि, समुद्र और हवा के जरिये आवागमन एवं परिवहन की सुविधा होनी चाहिए।’’

भारत व्यापार के लिए भरोसेमंद और वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए ईरान और अफगानिस्तान के साथ मिलकर करीबी से काम कर रहा था। इस उद्घाटन समारोह से इतर भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच मंत्रिस्तरीय त्रिपक्षीय बैठक भी हुई। इस बैठक में तीनों देशों ने क्षेत्रीय बाजारों के साथ संपर्क तथा सम्बद्ध देशों की अर्थव्यवस्थाओं के एकीकरण के बेहतर अवसर तलाशने के लिए बंदरगाह, सड़क एवं रेल नेटवर्क समेत संपर्क की ढांचागत संरचनाओं के लिए सम्मिलित तौर पर काम करने की सहमति जतायी।विदेश मंत्रालय ने बताया कि राधाकृष्णन ने आज भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच हुई दूसरी त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक में देश का प्रतिनिधित्व किया।

ईरान के परिवहन मंत्री अब्बास अखौंदी और अफगानिस्तान के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री हुमायूं रासव ने अपने अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया।बैठक में तीनों देश बंदरगाह के विकास की प्रगति का आकलन किया और इसे शीघ्र पूरा कर परिचालन शुरू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। तीनों पक्षों ने महसूस किया कि इससे अफगानिस्तान को क्षेत्रीय एवं वैश्विक बाजारों की पहुंच उपलब्ध होगी।क्षेत्रीय आॢथक संपर्क के केंद्र के रूप में चाबहार के महत्व पर जोर देते हुए मंत्रियों ने इस बंदरगाह के जरिये अफगानिस्तान को भारत द्वारा सफलतापूर्वक गेहूं भेजे जाने में परस्पर सहयोग की सराहना की।भारत ने अफगानिस्तान को 1.10 लाख टन गेहूं से भरा पहला जहाज पिछले महीने इसी बंदरगाह के रास्ते भेजा था।

पिछले साल मई में ईरान के साथ हुए एक करार के तहत भारत ने 10 साल के पट्टे पर इस बंदरगाह में 852.10 लाख डॉलर के निवेश एवं 229.5 लाख डॉलर के सालाना राजस्व खर्च के साथ प्रथम चरण में दोनों गोदियों को माल चढ़ाने उतारने के यंत्र उपकरणों एवं सुविधाओं से लैस करने तथा उनके परिचालन की जिम्मेदारी ली।इस विस्तार से इस बंदरगाह की क्षमता तीन गुना बढ़ जाएगी और यह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में निर्माणाधीन गवादर बंदरगाह के लिए एक बड़ी चुनौती होगा।हालांकि रूहानी ने अपने भाषण में इस परियोजना के साथ जुड़ी प्रतिद्वंद्विता की बातों की उपेक्षा करते हुए कहा कि इससे आसपास के क्षेत्रीय देशों के बीच ‘सम्पर्क और एकता’ बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सकारात्मक प्रतिस्पर्धा के लिए आगे बढऩा चाहिए। हम क्षेत्र में अन्य बंदरगाहों का स्वागत करते हैं, हम गवादर के विकास का भी स्वागत करते हैं।’’इस 34 करोड़ डॉलर की परियोजना का निर्माण ईरान की रीवॉल्यूशनरी गार्ड (सेना ) से संबद्ध कंपनी खातम अल-अनबिया कर रही है। यह सरकारी निर्माण परियोजना का ठेका पाने वाली ईरान की सबसे बड़ी कंपनी है। ठेका पाने वालों में कई छोटी कंपनियां भी शामिल हैं जिनमें भारत की एक सरकारी कंपनी भी शामिल है। इस बंदरगाह की सालाना मालवहन क्षमता 85 लाख टन होगी जो अभी 25 लाख टन है।

इस विस्तार में पांच नयी गोदिया हैं जिनमें से दो पर कंटेनर वाले जहाजों के लिए सुविधा दी गई है।भारत के लिए यह बंदरगाह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारत के लिए मध्य एशिया से जुडऩे का सीधा रास्ता उपलब्ध कराएगा और इसमें पाकिस्तान का कोई दखल नहीं होगा।उल्लेखनीय है कि चाबहार बंदरगाह के उद्घाटन से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कल तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ से मुलाकात की थी। बैठक के दौरान चाबहार बंदरगाह परियोजना के क्रियान्वयन समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा की गयी थी। स्वराज शंघाई सहयोग संगठन के वाॢषक सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस के सोची गयी हुई थीं। वहां से वापसी में वह कुछ देर तेहरान में रुकी थीं।

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