September 24, 2021
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बदहाल सड़कें, नगर में पैर पसारता अवैध अतिक्रमण, सड़कों तक दुकानों का सामान, सड़कों पर लोड़िग अनलोडिंग, आखिर इन समस्याओं से कब मिलेगी लोगों को निजात, प्रशासन है कि सबकुछ देखकर भी अनजान बना हुआ

हरितछत्तीसगढ़- विवेक तिवारी

पत्थलगांव। राष्ट्रीय राजमार्ग की खस्ता हालत की वजह से लोगों का परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क कीचड़ व गड्ढों के बीच कहीं गुम हो गई है और लोगों को गड्ढों से होकर सड़क पार करनी पड़ रही है। सड़क की जर्जर स्थिति की वजह से लोग आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
विदित हो कि राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पत्थलगांव के बीच से होकर गुजरता है। यह सड़क नगर को जिलामुख्यालय जशपुर और जिला मुख्यालय अंबिकापुर से जोड़ता है। प्रतिदिन बसें व अन्य भारी वाहन यहां से होकर गुजरते हैं वहीं यहां से गुजरने वाले दुपहिया वाहनों की संख्या हजारों में हैं। बारिश और रखरखाव पर ध्यान न दिए जाने के कारण राजमार्ग की हालत खस्ता हो गई है। अंबिकापुर रोड के बीटीआई चौक से लेकर पालीडीह तहसील कार्यालय तक सड़क पर केवल गड्ढे और कीचड़ ही बचे हैं। मरम्मत के अभाव में सड़क टूट-फूट कर जर्जर हो गई है। इससे लोगों को आवागमन के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर मरम्मत के अभाव में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। आलम यह है कि सड़क के गड्ढों से होकर जाने के अलावा लोगों के पास कोई रास्ता नहीं बचा है। यहां तक कि लोगों का सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। बारिश की वजह से गड्ढों में पानी भरा हुआ है। ऐसे में सड़क से होकर गुजरते समय नागरिकों को हमेशा दुर्घटना का भय लगा रहता है। गड्ढों में फंसकर दुपहिया वाहन अक्सर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। सड़क के गड्ढों से बचाने के लिए चालक वाहनों को अक्सर सड़कों के किनारे तक ले आते हैं जिससे यहां से गुजरने वाले बच्चों के साथ भी दुर्घटना होने का भय लगा रहता है।

नगर की सड़कें अक्रिमण के आगोस में,
शहर में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तो शुरू की जाती है, उसके पश्चात् प्रशासन एवं नगर वयवसायी फिर अपने जद पर आ जाते है। नगर के तीनों मुख्य मार्गों में सड़कों तक सामान निकालना, सड़क पर वाहन खड़ी करके लोड़िग अनलोडिंग करना आम हो जाता है। जिससे नगर के तीनों मार्गांें पर घंटों जाम लग जाता है। कभी-कभी एंबुलेंस, स्वयं जिले के आला अधिकारी इस जाम में फंसे नजर आते है। प्रशासन का सब देखकर भी अनजान बना रहना आमजनों के समझ से परे है। वे स्वयं अपने आप से सवाल करते नजर आते है कि अब कोई अवतार लेकर ही इन समस्याओं से हमें निजात दिलवा सकता है। यदि प्रशासन के हाथ में होता तो आजतलक इन समस्याओं का स्थाई निराकरण निकाल लिया होता।

ट्रैफिक जवान भी इस समस्या से निजात दिलाने में मजबूर
वहीं ट्रैफिक के जवान अपनी ड्यूटी तो निभाते नजर आतें है परन्तु कई नागरिकों का सहयोग न मिलने ेसे उन्हे भी काफी मसक्कत करना पड़ता है। उनके द्वारा कार्रवाई करने पर कुछ तो अपने रईसाई एवं उंची पहुंच का धौंस दिखा वापस भेज देते है। लगता है मानों उच्च अधिकारियों का साथ न मिल पाने के कारण ये भी कहीं न कहीं मजबुर नजर आते है।

harit

 

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