October 18, 2021
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ऑनलाइन कार्य, वाट्सप, तत्काल डाक जैसे फरमानों से शिक्षकों के पढ़ाई कार्यों में बाधा बना रखा है ,शिक्षा विभाग इसे संज्ञान में ले सरकार

ऑनलाइन कार्य, वाट्सप, तत्काल डाक जैसे फरमानों से शिक्षकों के पढ़ाई कार्यों में बाधा बना रखा है ,शिक्षा विभाग इसे संज्ञान में ले सरकार
छ.ग.सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष मनीष मिश्रा और प्रांतीय प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर ने संयुक्त बयान जारी कर शासन को संज्ञान लेने कहा है, ज्ञात हो कि कोरोना काल के बाद
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के नाम पर हो रही है कागजी खेल मात्र है, सरकार को पढ़ाई से कोई मतलब नही, जहां बच्चों को कोरोना काल से निकाल अब थोड़ी बहुत 50%के दर से स्कूलों को खोला गया है वंही विभाग इतना जल्दी शिक्षकों के ऊपर टूट पड़े है ,जैसे इनको केवल कागजों में रिकार्ड चाहिए शिक्षा के गुणवत्ता के लिए शिक्षक अभी पूरी कोशिश में लगे है और वैसे भी जानता है 50% उपस्थिति के हिसाब से पढ़ाने में समस्या भी आ रही है फिर भी शिक्षक अपना। 100%देने तैयार है लेकिन राज्य और जिला स्तर में आए दिन रोज-रोज डाक का कार्य और अपने जिम्मेदारी को सीधे स्कूलों/ शिक्षकों के ऊपर डाल ऑनलाइन लिंक भेजकर थोपने की नई चलन शुरू कर दी गई है, जिससे शिक्षक बच्चों की पढ़ाई करवाए या स्कूलों में डाक मेन का काम करें समझ से परे है आज शिक्षकों को स्कूल जाने से पहले ही तत्काल जानकारी के नाम पर और ऑनलाइन एंट्री के नाम पर जरूरत से ज्यादा अतिरिक्त बोझ दिया जा रहा है, राज्य शासन के शिक्षा विभाग तो वाट्सप के माध्यम से सीधे पत्र जारी कर दे रहे है पर स्कूलों को दबाव भी बनाया जाता है, आदेश/निर्देशो को सीधे फारवर्ड कर दिया जाता है कि इसे तत्काल प्राथमिकता से पालन करने कहा जाता है, आज शिक्षक बच्चों को कैसे पढ़ाई करवाए समझ से परे है जंहा एक ओर क्षात्रवृत्ति, DBT, आनलाइन आंकलन,ऑनलाइन कोर्स, रोज रोज स्कूल की तत्काल जानकारी, बच्चों की एंट्री,राज्य कार्यालय के वेबसाइट में स्कूल ड्रेस,पुस्तक वितरण और न जाने हजारों कार्य शिक्षकों से सीधा करवाया जा रहा है, नेट समस्या होने पर शिक्षक पढ़ाई छोड़कर दिन रात उसी में लगा रहता है इससे बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता की अपेक्षा करना बेमानी ही है , बच्चों की पढ़ाई और स्तर में सुधार के लिए शिक्षक और स्कूल पूर्ण रूप से अपने दायित्वों को पूरा करने संकल्पित है पर आये दिन रोज शिक्षा विभाग के ऐसे फरमानों से सीधा सरकार को लाभ हो सकता है पर असल और जमीनी हकीकत ये है कि अब शिक्षकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है शिक्षामंत्री, और सरकार को इस दिशा में संज्ञान लेने की जरूरत है, शिक्षक रोज डाक में व्यस्त हो जाते है, तो ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों से अपेक्षा न रखें, या तो हाई स्कूलों की तरह मिडिल, और प्राथमिक स्कूलों में 1-1 डाक बाबू की भर्ती करें जिससे शिक्षक स्कूलों में अपना 100%लगाकर बच्चों को पढ़ा सके,या ऐसे कार्यों से शिक्षकों को दूर रखें जिससे शिक्षा की गुणवत्त्ता बेहतर करने वाट्सएप में तत्काल जैसे डाक जानकारी मंगाना बंद करें….और इस दिशा में संज्ञान ले…सहायक शिक्षक फेडररेशन से प्रांतीय पदाधिकारियों शिव मिश्रा,कौशल अवस्थी,बसंत कौशिक,छोटेलालसाहू, अजय गुप्ता,रंजीत बनर्जी,अश्वनी कुर्रे,बलराम यादव ,सिराज बक्श,, पिंकी शर्मा, राजू टंडन आदि के साथ सभी पदाधिकारियों ने भविष्य में शिक्षा गुणवत्ता बनाए रखने में ऐसे अतिरिक्त कार्यों से शिक्षकों को दूर रखने बच्चों के लिए केवल पढ़ाई को फोकस करने सरकार को संज्ञान में लेने कहा है,……

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