August 5, 2021
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मानव निर्मित है रामसेतु,जानिए रामसेतु मामले मे क्यों है विवाद

मानव निर्मित है रामसेतु,जानिए रामसेतु मामले मे क्यों है विवाद

नई दिल्ली: रामसेतु का अस्तित्व है या नहीं, इसे लेकर एक बार फिर बहस और राजनीति शुरू हो गई है। एक साइंस चैनल ने दावा किया है कि रामसेतु कोरी कल्पना नहीं हो सकता है क्योंकि इस बात के प्रमाण हैं कि भारत और श्री लंका के बीच स्थित इस बलुई रेखा पर मौजूद पत्थर करीब 7000 साल पुराने हैं। इसके बारे में मान्यता है कि भगवान राम और उनकी वानर सेना ने श्री लंका में रावण पर हमले के लिए इस सेतु का निर्माण किया था।अमेरिका के साइंस चैनल ने एक शोध किया है जिसमें दावा किया गया है कि भारत और श्रीलंका के बीच जो पुल है वो मानव निर्मित ही है. साफ है कि इस शोध से एक बार फिर रामसेतु की अवधारणा को बल मिला है. हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक भागवान राम ने माता सीता को लंका के राजा रावण की कैद से छुड़ाने के लिए इस पुल का निर्माण कराया था.

एडम्स ब्रिज या रामसेतु: भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की चेन है, इसे भारत में रामसेतु व दुनिया में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जाना जाता है। इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील (48 किमी) है। यह ढांचा मन्नार की खाड़ी और पॉक स्ट्रेट को एक दूसरे से अलग करता है।इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है। समुद्र में इन चट्टानों की गहराई सिर्फ 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है। इस चट्टानी उथलेपन के कारण यहां नावें चलाने में खासी दिक्कत आती है। कहा जाता है कि 15 शताब्दी तक इस ढांचे पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था लेकिन तूफानों ने यहां समुद्र को कुछ गहरा कर दिया इस पुल को एडम्स पुल भी कहा जाता है. शोध के मुताबिक ये पुल करीब 7 हजार साल पुराना है और इसकी लंबाई करीब 30 मील है. 7 हजार साल पहले बिना मशीनों के इस पुल को भला कैसे बनाया गया होगा?

रामायण की कहानी के मुताबिक राम ने पहले समुद्र से रास्ता मांगा था लेकिन तीन दिन तक यज्ञ के बावजूद समुद्र ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने अग्निबाण से समुद्र को सुखा देने के बारे में सोचा. समुद्र वहां पहुंचा और कहा कि नल और नील के पास पुल बनाने की कला है और वह लंका तक पुल बना सकते हैं.नल और नील ने एक ऐसा पुल बनाया जिसके पत्थर पानी पर तैरते थे. रामेश्वर में अभी भी कुछ ऐसे पत्थर पूजे जाते हैं. कई हिन्दू ग्रंथों में इस पुल का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि सुनामी और अन्य समुद्री तूफानों के कारण ये पुल छिन्न-भिन्न हो गया.इस बीच एक ऐसी बहस भी चली जिसमें इस पुल के मानव निर्मित होने पर सवाल उठाए गए. दरअसल कुछ लोगों का मानना है कि ये प्राकृतिक संरचना है और इसे राम द्वारा नहीं बनवाया गया था. माना ये भी जाता है कि इस पुल के नीचे कहीं यूरेनियम का भंडार भी है.रामसेतु तब भी सुर्खियों में आया था जब इसे तोड़ कर रास्ता बनाए जाने की बातें हो रही थीं. अब रामसेतु एक बार फिर ना केवल सुर्खियों में है बल्कि सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है. बीजेपी नेता साइंस चैनल के ट्वीट को रिट्वीट कर रहे हैं.क्या है सेतुसमुद्रम परियोजना: 2005 में भारत सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना का ऐलान किया। इसके तहत एडम्स ब्रिज के कुछ इलाके को गहरा कर समुद्री जहाजों के लायक बनाया जाएगा। इसके लिए कुछ चट्टानों को तोड़ना जरूरी है।

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