December 4, 2021
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खेल मंत्री के जिले में खेलो की दुर्गती, प्रशासन मस्त, खिलाड़ी त्रस्त

सीएसआर मद का उचित फायदा नहीं मिल रहा खिलाड़ियों को
खेल की आड़ में हो रहा मद का बंदरबाट


हरित छत्तीसगढ़/रायगढ़. खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर कोशिश कर रही है मगर वर्तमान में देखा जाये तो रायगढ़ की खेल सुविधा का मुख्य दारोमदार जिला प्रशासन के पास है जिसमें मुख्य रूप से जिला का सबसे बड़ा स्टेडियम बोइरदादर स्टेडियम, स्पोर्टस काम्पलेक्स, रामलीला मैदार, चक्रधर क्लब नटवर स्कूल मैदान, मिनी स्टेडियम और संजय मैदान इत्यादि है। अगर सुविधा की स्थिति को मापा जाये तो इसकी शक्ल रायगढ़ की सड़को की हालत से हुबहू मिलती जुलती है। वैसे तो जिला स्वयं खेल मंत्री का जिला है पर इससे रायगढ़ को कोई फायदा मिलता नजर नहीं आता रही सही कसर जिला प्रशासन तो पूरी कर ही देता है। सारी कड़ी को इस प्रकार समझा जा सकता है। बोइरदादर स्टेडियम एवं स्पोर्टस काम्पलेक्स का संचालन स्टेडियम समिति करती है जिसके अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर है और सचिव निगम आयुक्त परंतु विगत 10 वर्षो में इस समिति की एक बैठक भी नहीं हुयी है। जिससे स्पष्ट हो जाता है कि प्रशासन खेल और खेल के प्रति मिलने वाली सुविधाओ के प्रति कितना गंभीर है। अगर खेलवार देखा जाये तो स्थिति बेहतर समझ आए एथलेटिक्स ट्रेक या अन्य संसाधनों का नामो निशान नहीं है। बॉस्केटबाल एक मात्र कोर्ट जिसके लिए आपस में खिलाड़ी भिड़ जाते है जो विगत कई वर्षो से किसी सुविधा का कोई विस्तार नहीं हुआ है। बैडमिंटन कोर्ट की लकड़ियां सड़ चुकी है और कई जगह गडढे भी हो गए है, मैट फट चुका है जिससे खिलाड़ी चोटिल हो रहे है। हाल की छत से पानी टपकता है। ताईक्वांडो/मार्शल यह खेल के बहुत सीखने और खेलने वाले है पर इनका खुद का कोई स्थान निष्चित नहीं है वर्तमान में टेबल टेनिस हाल में खेल संचालित हो रहा है और विभिन्न प्रतियोगिताओं के लए किसी अन्य खेल के साधनों का उपयोग करना पड़ता है। जिसके कारण इन्हें दूसरे खेल के खिलाड़िं से तू-तू मैं-मैं भी हो जाती है। रोल बाल-इस खेल के खिलाड़ी भी वर्तमान समय में अच्छा प्रदर्षन कर रहे है पर इनके खेलने के लिए खुद का मैदान अथवा नियम अनुरूप कोई सुविधा नहीं है। स्वीमिंग-सर्वाधिक लोगों का जमावड़ा हां हुआ करता था लेकिन विगत दो वर्षो से स्विमिंग बंद है या यह कहें कि सूखा पड़ा है। बालीबाल-यहां खिलाड़ियों ने खुद के व्यय से मड कोर्ट तैयार कर लिया है क्योंकि इन्हें पूरा विश्वास हो गया था कि शासन प्रशासन कुछ नहीं करेगा। हॉकी-हॉकी के लिए कोई मैदान ही नहीं है। फुटबाल-फुटबाल खिलाड़ी शुरू से ही आभाव में जी रहे है। यही नहीं स्टेडियम की देख-रेख के लिए कार्य कर रहे कर्मचारियों को भी महंगाई में वेतन मात्र 3500 रूपये ही मिल रहा है अपनी मांग को लेकर कर्मचारी अपने फरियाद लेकर दर-दर भटकते रहे मगर होता कुछ नहीं।
देखा जाये तो सीएसआर मद प्रशासन के पास होता है पर देखा गया है कि इसका उपयोग अधिकारी अपने स्वार्थ हित के लिए करते है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण वुडन वैडमिंटन कोर्ट चक्रधर क्लब में, टेनिस कोर्ट स्पोर्टस काम्पलेक्स में जबकि खिलाड़ियों के हाथ में कुछ नहीं। सूत्रां की माने तो खेल अधिकारियों एवं नेताओं से दोस्ती करने का जरिया मात्र रह गया है वर्षो से खेल संघों के लोग कुंडली मार के बैठे है और खुद को लाभ पहुंचा रहे है और सही खिलाड़ियों के पास सुविधा के नाम पर ठेंगा दिखा दिया जाता है जबकि इंडस्ट्री होने के कारण आज रायगढ़ में फंड की कमी नहीं होनी चाहिए मगर ऐसा क्या कारण है कि खिलाड़ी को सुविधा नहीं मिल पा रही है युवा और उर्जावान कद्दावर मंत्री के पास यह विभाग भी है। बहरहाल समय रहते इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षो में खेल की हालत क्या होगी यह तो समय ही बतायेगा।
इस संबंध में स्पोर्टस एंड यूथ वेलफेयर के असिस्टेंड डायरेक्टर संजय पाल से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है बल्कि स्टेडियम प्रभारी मुकेश चटर्जी से बात करने को कहा और जवाबदेही सचिव निगम आयुक्त के उपर टाल दिया। स्टेडियम प्रभारी मुकेश चटर्जी का फोन स्वीच ऑफ होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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