December 4, 2021
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दुर्गोत्सव-समिति के पंडालों का आकर्षण बरकरार..मा-नारायणी-दुर्गोत्सव समिति पंडाल-साज-सज्जा दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती हुई।

दुर्गोत्सव-समिति के पंडालों का आकर्षण बरकरार..मा-नारायणी-दुर्गोत्सव समिति पंडाल-साज-सज्जा दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती हुई।

*मा-कामाख्या..मा-शितलेश्वर के आकर्षक-पंडालों में भी दर्शनार्थियों की उमड़ रही है..भीड़।।*

*शितलेश्वर-दुर्गोत्सव-समिति के पंडाल के सामने समिति के लोगो ने श्रद्धांजलि के रूप में स्व:राजेन्द्र कौशिक की लगाई है..तस्वीर।*

*रावण-दहन के साथ नगर में निकलने वाली झांकियों के प्रदर्शन पर कोविड को लेकर जिला-प्रशासन की गाइडलाइंस को लेकर समिति व झांकी निर्माता पेशोपेश में।*

*दिनांक:-14/10/2021*

*सवांददाता:-मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़ करगीरोड कोटा।।*

*करगीरोड-कोटा:-शारदीय-नवरात्रि पर्व का आज नवमीं हैं..पर कोटा-नगर के दुर्गोत्सव-समिति के पंडालों का आकर्षण बरकरार हैं..वार्ड नं 09-डोंगरिपारा के मा-नारायणी दुर्गोत्सव-समिति की आकर्षक-झांकियां बेहतरीन प्रस्तुति का शानदार 19-वर्ष है..मां नारायणी दुर्गा-उत्सव समिति पहाड़ो में विराजमान-सिद्धबाबा के हृदय स्थल में विराजित है झांकियों को लेकर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रामायण पर आधारित आकर्षक-झांकियां बनाती आ रही है..मा-नारायणी दुर्गा उत्सव समिति के प्रांगण में शानदार 19-वर्ष पर एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया..समिति ने बलराम सोंधिया(बल्ला)जो कि 19-वर्षों से अपनी कला का प्रदर्शन मां नारायणी के पंडाल में करते आ रहे हैं..समिति द्वारा उन्हें गणेश प्रतिमा का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया साथ ही समिति के सदस्य वेंकट लाल अग्रवाल द्वारा सम्मानित-सदस्यों को बधाई दी धर्मेंद्र-अग्रहरि-व-मनीष अग्रवाल-सूरज गुप्ता के द्वारा समय-समय पर मां नारायणी-दुर्गा-उत्सव समिति के लोगो को प्रोत्साहित करते रहते हैं।*

मा-शितलेश्वर-दुर्गोत्सव-समिति के सदस्यों ने स्व:राजेन्द्र-कौशिक को श्रद्धा-सुमन-अर्पित करते हुए पंडाल के सामने तस्वीर लगाई-

*स्टेशन-रोड स्थित मा-कामख्या दुर्गोत्सव-समिति के साथ साथ मा-शितलेश्वर-दुर्गोत्सव समिति के आकर्षक पंडालों में भी दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ रही है..मा कामख्या-दुर्गोत्सव समिति का भी शानदार 25-वर्ष है..मा शितलेश्वर-दुर्गोत्सव-समिति हटरी चौक के सदस्यों में अधिकांश युवा वर्ग शामिल हैं शितलेश्वर-दुर्गोत्सव-समिति के सदस्यों ने अपने पंडाल के ठीक सामने ही हाल में ही स्व:राजेन्द्र कौशिक जिनका की एक सड़क दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया था. श्रद्धांजलि के रूप में उनकी तस्वीर को पंडाल के ठीक सामने लगाकर रखा हुआ है स्व:राजेन्द्र कौशिक दुर्गोत्सव-समिति से जुड़े हुए थे।*

प्रसिद्ध-चण्डी मंदिर व बड़ी मड़िया-मंदिर में भी शारदीय-नवरात्रि पर दर्शनार्थियों की भीड़–


*दुर्गोत्सव-समिति के पंडालों के अलावा कोटा-नगर के प्रसिद्ध मा चंडी मंदिर-बड़ी-मड़िया मंदिर में भी भक्तों की भीड़ देखी जा रही है..शारदीय-नवरात्रि पर्व पर इन मंदिरों में भक्तों के द्वारा श्रद्धा-स्वरूप ज्योति कलश जलाई जाती है..अष्टमी-व-नवमी पर शाम-रात तक भक्तों की भीड़ मंदिरों में उमड़ती रही जो कि अभी भी बदस्तूर जारी है..मंदिर प्रबंधन भी दर्शनार्थियों से जिला-प्रशासन के आदेश के अनुसार से कोविड के नियमो का पालन करवाती रही।*


रावण-दहन सहित झांकियों पर जिला-प्रशासन की गाइडलाइन का साया समिति व झांकी-निर्माता पेसोपेश में:-

*जिला-प्रशासन के द्वारा कोविड को लेकर पुनःजारी गाइडलाइंस को देखते हुए इस बार दशहरा पर्व पर कोटा नगर में निकलने वाली झांकिया निकलने की संभावना कम दिखाई दे रही है..रावण के पुतला-दहन पर भी जिला-प्रशासन के गाइडलाइन का असर दिखाई देने लगा है..कोटा नगर का दशहरा पर्व पूरे बिलासपुर जिले के आसपास इलाको में काफी प्रसिद्ध है..दशहरा-पर्व पर निकलने वाली झांकियों के कारण शाम से लेकर रात तक आसपास के ग्रामीण-क्षेत्रों के ग्रामीणों की काफी तादात में भीड़ रहती है..नगर के छोटे-बड़े व्यपारियो का भी व्यपार अच्छा रहता है..बढ़ती हुई महंगाई का असर व नगर के लोगो के द्वारा प्रोत्साहन नही मिलने से हताश इस बार पुराने खांटी झांकी-निर्माताओं ने झाँकी नही बनाने का फैसला लिया है..कुछ जगहों पर झांकी बनाएं जाने की सूचना प्राप्त हो रही है..नगर-दशहरा-समिति भी इस बार जिला-प्रशासन के कोविड को लेकर जारी गाइडलाइन को लेकर पेशोपेश में है।*


*कोटा-नगर में दशहरा-पर्व में निकलने-वाली झांकीयो की शुरुआत 1980-81 से हुई थी:—*

*हरितछत्तीसगढ़” अपने पाठकों को बताना चाहता है कि दशहरा-पर्व पर कोटा-नगर में झांकी-निकालने की परंपरा 1980-81-में हुई थी..उस समय के धुरंधर झांकी निर्माताओं में स्व:मूलचंद पेंटर व स्व:श्याम सुंदर अग्रवाल जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है..झांकी निर्माण में दोनों की जुगलबंदी रहती थीं..स्व मूलचंद नामदेव पेंटर की झांकियों में ज्वलंत मुद्दों पर जनमानस को लेकर कोई न कोई संदेश होता था..उसके अलावा ला-कालेज के स्टूडेंट फूलचंद अग्रहरि सुनील गुप्ता..अरुण चौहान के द्वारा भी झांकी बनाई जाती थी उसके बाद ये सिलसिला बढ़ता गया..झांकी-निर्माताओं में डाकबंगला के प्रसिद्ध शरीफ पेंटर नगर के ही नामी पेंटर में राम पेंटर..भुवन पेंटरों के द्वारा झांकी लगातार हर वर्ष दशहरा पर्व पर बनाई जाती रही है..और दशहरा पर्व पर नगर में निकाली जाती रही है..कोटा-नगर की झांकियों को बाद में फिर बिलासपुर के दुर्गोत्सव-समिति के द्वारा ले जाई जाती थी.. झांकी बनाने व झांकी निकालने की परंपरा वर्तमान में कुछ दुर्गोत्सव-समिति व नगर के नवयुवकों द्वारा बनाए जाने की परंपरा बदस्तूर जारी है..”हरितछत्तीसगढ़” दशहरा-पर्व पर कोटा-नगर को नई पहचान देने वाले झांकी बनाने व नगर में निकालने की परंपरा बनाने वाले झांकी-निर्माता स्व:मूलचंद पेंटर व स्व:श्याम सुंदर अग्रवाल जी को अपनी श्रद्धा-सुमन अर्पित करता है।*

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