November 29, 2021
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गुजरात में अब CM चुनने की जिम्मेदारी मिली छग की सरोज पांडे को

गुजरात में अब CM चुनने की जिम्मेदारी मिली छग की सरोज पांडे को

नई दिल्‍ली: गुजरात चुनाव में बीजेपी के बहुमत के आंकड़े को पार करने के बाद लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि राज्‍य का मुख्‍यमंत्री कौन होगा इस सम्बन्ध में भाजपा शीर्ष नेतृत्व कवायद में जुट गयी है खबर है की गुजरात में शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री  का चेहरा तय करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय व  वित्त मंत्री अरुण जेटली को सौपी है . उत्‍सुकता इस बात की है कि सीएम की कमान फिर विजय रूपानी संभालेंगे या फिर शीर्ष नेतृत्‍व किसी नए चेहरे को मौका देगा. एक तरह से यह चुनाव रूपाणी सरकार के प्रदर्शन का ‘टेस्‍ट’ था, जिसमें मुश्किलों के बाद ही वे सफल हो पाए. वही इस बार यहां  का मुख्यमंत्री महिला होगा या पुरुष यह भी शंशय की स्थिति में है  माना जा रहा है की नये मुख्यमंत्री चयन में छत्तीसगढ़ की भाजपा नेत्री सरोज पांडे इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है प्रदेश के मुखिया का चेहरा तय करने के लिए बीजेपी संसदीय बोर्ड ने राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय और वित्त मंत्री अरुण जेटली को पर्यवेक्षक बनाते हुए जिम्मेदारी सौंप दी है।

चुनाव से पहले माना जा रहा था कि जीतने के बाद रुपाणी ही प्रदेश के मुखिया बनेंगे, लेकिन नतीजे आने से पहले ही सीएम पद को लेकर उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के बयान से यह संकेत मिला कि अपने सबसे मजबूत गढ़ में पार्टी इस बार नया चेहरा लाकर सरप्राइज दे सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुजरात और हिमाचल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? अब  राष्ट्रीय महासचिव सरोज पांडेय व  वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों गुजरात में विधायक दल की बैठक लेंगे और नए मुख्यमंत्री का नाम तय करेंगे। बताया जा रहा है की यह  तीसरा मौका होगा जब सरोज पांडेय किसी राज्य के लिए मुख्यमंत्री का नाम तय करने में भूमिका निभा रही है। इससे पूर्व में वह उत्तराखंड और गुजरात में भी मुख्यमंत्री चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा  चुकी है बहरहाल सूत्र बताते है की गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा  अपेक्षाकृत  सीटों की संख्‍या में आई कमी को लेकर  विजय रूपानी के जगह सीएम पद पर नया चेहरा लाने की  जुगत में है /बता दे की मोदी के केंद्र में जाने के बाद आनंदी बेन पटेल को सीएम बनाया गया था. आनंदी बेन के कार्यकाल के दौरान ही पाटीदार आंदोलन में जोर पकड़ा और इस आंदोलन को शुरुआती दौर में नियंत्रित नहीं कर पाने को लेकर सीएम की कार्यक्षमता पर सवाल उठे. ऐसे में उम्र के 70+ के फार्मूले के आधार पर आनंदी बेन की सम्‍मानजनक विदाई का रास्‍ता तैयार कर रूपानी के लिए राह बनाई गई थी, लेकिन वे भी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे. पाटीदार समाज की नाराजगी, दलित समाज पर ज्‍यादती की कथित घटनाओं और एंटी इनकमबेंसी फैक्‍टर ने बीजेपी के लिए इस बार चुनाव को मुश्किल बना दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी प्रमुख अमित शाह का गृह राज्‍य होने के कारण ये चुनाव पार्टी के लिए बेहद प्रतिष्‍ठापूर्ण थे.

haritchhattisgarh.com

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