September 24, 2021
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सरकार के विरोध में रायपुर में जुटेंगे हजारों किसान, 8 जनवरी को किसान संकल्प सम्मेलन

सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में रायपुर राजधानी में जुटेंगे हजारों किसान, 8 जनवरी को किसान संकल्प सम्मेलन

हरितछत्तीसगढ़ रायपुर।छत्तीसगढ़ के विभिन्न किसान संगठनों द्वारा संपूर्ण कर्जमाफी स्वामीनाथन आयोग की प्रमुख सिफारिश लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य पिछले 2 वर्षों का धान 300 रुपये बोनस सहित जबरन भूमि अधिग्रहण को बंद करने पांचवी अनुसूची पेसा और वन अधिकार मान्यता कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांगों पर 8 जनवरी 2017 को गांधी मैदान रायपुर में एक दिवसीय किसान संकल्प सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है इस सम्मेलन में प्रदेश भर से किसानों सहित देश के जाने-माने किसान नेता व कृषि वैज्ञानिक कामरेड हन्नान मोल्ला महासचिव अखिल भारतीय किसान सभा ,श्री योगेंद्र यादव स्वराज आंदोलन एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम विशेष रुप से उपस्थित रहेंगे।

इस संबंध में जानकारी देते हुए सुदेश टीकम,रमाकांत बंजारे ,आनंद मिश्रा ,नंद कुमार कश्यप व आलोक शुक्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश में किसान और कृषि दोनों ही गहरे संकट में है वर्ष 2003 से लगभग 6 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। धान का कटोरा कहे जाने वाले हमारे छत्तीसगढ़ में भी किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में किसान आत्महत्या बड़ी है बेतहाशा बढ़ती लागत एवं फसलों के सही दाम नहीं मिलने पर कड़ी मेहनत के बाद भी 99 फ़ीसदी किसान और ज्यादा गरीब व कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं ,भारत में किसानों की हालत सुधारने और कृषि संकट से उबरने के लिए स्वामीनाथन आयोग का गठन हुआ जिसने 2006 में अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी इसमें इतिहास में पहली बार किसान के श्रम को भी एक मूल्य की तरफ देखा गया और फसलों के मूल्य निर्धारण में इसे लागत में जोड़ने की सिफारिश की गई भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने एवं किसानों को बोनस देने का वादा किया था परंतु 2014 में केंद्र में सरकार बनाने और छत्तीसगढ़ में तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भी उसने अपना वादा पूरा नहीं किया।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ में गंभीर सूखे की स्थिति है किसान को कर्ज चुकाना तो दूर की बात है उसे अपना जीवन यापन करना भी मुश्किल हो रहा है इन परिस्थितियों में भी राज्य सरकार किसानों को राहत देने के बजाय उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की सब्सिडी दे रही है ,पिछले वर्ष ही कोयला खनन के क्षेत्र में मौजूदा सरकार ने राज्य सरकार को प्राप्त होने वाला राजस्व में से ही केवल चार चुनिंदा खनन कंपनियों को 3000 करोड़ की छूट स्टाफ ड्यूटी में दी गई सिर्फ चुनावी फायदे के लिए 2100 करोड़ रुपए मोबाइल वितरण के लिए आवंटित किया गया इतना ही नहीं प्रदेश के बीस हजार गांव को मिलने वाले 14वें वित्त आयोग की राशि में अवैधानिक ढंग से कटौती करते हुए 600 करोड रुपए मोबाइल टावर लगाने टेलीकॉम कंपनियों को दिया जा रहा है । उन्होंने कहा कि हाल ही में एक और जनविरोधी व उद्योग के हितों में निर्णय लेते हुए आदेश जारी किया गया, जिसमें ग्रीष्मकालीन धान की फसल एवं सिंचाई पर पाबंदी लगाते हुए उद्योगों को पानी पर पहली प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया या आदेश स्पष्ट रुप से यह दर्शाता है कि राज्य में जल उपयोग की प्राथमिकता में सिंचाई को अंतिम पंक्ति में रखते हुए औद्योगिक जल उपयोग को पहली प्राथमिकता दी गई। घने वन क्षेत्र के आदिवासी किसानों को खनन बांध व उद्योग के नाम पर स्थापित किया जा रहा है। पांचवी अनुसूची पेसा एवं वन अधिकार मान्यता कानून के प्रावधानों का उल्लंघन कर आदिवासियों के जंगल जमीन को विधि विरोध तरीके से पूंजी पतियों को दिए जाने का कार्य स्वयं राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है यहां तक कि वर्ष 2013 में बने भू अधिग्रहण और पुनर्वास कानून में राज्य सरकारों द्वारा कंपनियों के पक्ष में संशोधन करते हुए उसे कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं उन्होंने कहा कि कल ही विधानसभा में एक और आदिवासी किसान विरोधी निर्णय लिया गया जिसमें आदिवासियों की जमीन को खरीदने के छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता में संशोधन किया गया उन्होंने बताया की राज्य सरकार के इस निर्णय से आदिवासियों की जमीनों का हस्तांतरण कॉर्पोरेट को होगा जिसमें सरकार एक एजेंट के रूप में भूमिका निभाएगा । उन्होंने अवैधानिक संशोधन को शीघ्र वापस लेने की मांग करते हुवे बताया कि इस सम्मेलन में छत्तीसगढ बचाओ आंदोलन ,जिला किसान संघ राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, मजदूर कार्यकर्ता समिति ,अखिल भारतीय किसान सभा ,छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अणय बचाओ संघर्ष समिति, किसान संघर्ष समिति कुरूद ,आदिवासी महासभा बस्तर, दलित आदिवासी मजदूर संगठन रायगढ़, दलित आदिवासी मंच सोनाखान ,संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा कांकेर ,पेंड्रावन जलाशय बचाओ ,किसान संघर्ष समिति बगोली रायपुर ,भारत जन आंदोलन सरगुजा, गांव गणराज्य अभियान सरगुजा, जन अधिकार संगठन कांकेर,मेहनतकश आवास अधिकार संघ रायपुर, जशपुर जिला संघर्ष समिति, भारतीय खेत मजदूर यूनियन, राष्ट्रीय आदिवासी विकास परिषद छत्तीसगढ़ इकाई रायपुर भी शामिल होंगे।

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