January 20, 2022
Breaking News

राहा ने 3 हजार महिलाओं का संगठन बनाया,जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से बचाने महिला संगठन करेगा सार्थक पहल

जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम से बचाने महिला संगठन करेगा सार्थक पहल
हरित छत्तीसगढ़ पत्थलगांव /
ग्रामीण महिलाओं को अपने अधिकार और खेती के काम में सशक्त बनाने के लिए केयर इण्डिया के सहयोग से यंहा की समाजसेवी संस्था राहा ने 20 गांवों में 3 हजार महिलाओं का संगठन बनाया है। इस संगठन की महिलाओं को अपने आस पास में जल संग्रहण और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम का नुकसान को रोकने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में बगीचा और पत्थलगांव में इस परियोजना की शुरूवात की गई है। इस संगठन में ग्रामीण महिलाओं की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली है।
उन्होने बताया कि पत्थलगांव विकास खण्ड में 96 स्वयं सहायता समूहों को मिलाकर एक महासंघ का निर्माण किया गया हैं। समीप ग्राम खरकटटा में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला का कार्यक्रम में जनपद सदस्य श्रीमती धनमती प्रधान एवं केयर इण्इिया से डा. प्रदीप कुमार मोहपात्रा के अलावा ग्राम पंचायत खरकट्टा सरपंच श्रीमती चन्दªवती पोरते, ग्राम पंचायत सचिव सेत राम लहरे, ग्राम पंचायत जामजुनवानी सरपंच श्रीमती रोजालिया खलखो ग्राम पंचायत सूरजगढ़ से श्रीमती प्रेमवती पेकरा भी उपस्थित थी ।
उन्होने बताया कि यहंा 96 स्वयं सहायता समूहो को मिलाकर महासंघ का निर्माण किया जा रहा हैं, जिसके अंतर्गत 7 संकुल का निर्माण किया गया हैं। इस संकुल के माघ्यम से महासंघ को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया गया हैं। संकुल का निर्माण आस-पास के 3 से 4 गांव को मिलाकर बनाया गया हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की परियोजना का काम को सुचारू ढंग से क्रियान्वित करने के लिए महीने में एक बार संकुल स्तर पर बैठक भी की जायेगी। महिलाओं का महासंघ के सदस्यों का चुनाव, इसमें सदस्यो की जिम्मेदारी तथा पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में सार्थक प्रयास की योजना पर काम शुरू किया गया है।
किसान पाठशाला में मिश्रित खेती पर जोर
राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि हमारे आस पास तेजी से सिमट रही हरियाली के चलते जलवायु परिवर्तन की विकराल समस्या सामने आ रही है।इस जटिल समस्या से ग्रामीण अचंल में रहने वाले आदिवासी परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो एवं पर्यापरण को नुकसान पहुंचाए बगैर ही जल संग्रहण और हरियाली में वृध्दि के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। इस काम को ग्रामीण महिलाओं के माध्यम से सफलता पूर्वक संचालित किया जा सकता है। इसके लिए बेहतर प्रशिक्षण और नियमित देखरेख करने से इसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। ग्राम विकास समिति का गठन के साथ जल उपभोक्ता समिति बनाने की भी पहल की जा रही है। किसान पाठशाला में किसानों को मिश्रित खेती करने के लाभ बताने के साथ इससे संबंधित कार्यो की नियमित जानकारी देकर इस परियोजना को गति दी जा जाएगी है। गांवों में चेक डेम बना कर इसकी महत्ता समझाने से अन्य ग्रामीणों को भी इस काम में जोड़ा जा सकता हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *