July 24, 2021
Breaking News

Selfie लेना है मानसिक बिमारी,जानिए सेल्फी का खतरनाक सच, जानकर रह जाएंगे दंग! इन लक्ष्णों को जानकर हो जाएं सावधान!

Selfie लेना है मानसिक बिमारी,जानिए सेल्फी का खतरनाक सच, जानकर रह जाएंगे दंग! इन लक्ष्णों को जानकर हो जाएं सावधान!


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सोशल मीडिया पर सेल्फी एक महामारी की तरह फैल चुकी है और हर कोई सेल्फी लेने में व्यस्त है।
नए कपड़े पहने, कैसे बाल कटवाए, जिम में वर्कआउट किया, क्या खाया, क्या पीया, क्या देखा, सबकी सेल्फी इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर सहित अन्य सोशल नेटआज के जमाने में सभी के पास स्मार्टफोन हैं। स्मार्टफोन में एक खास बात है कि दोनों तरफ कैमरे होते हैं जिससे हर तरह से कहीं भी और अकेले भी फोटो लेना आसान हो जाता है।
अमरीकन साइकेट्रिक एसोसिएशन के मुताबिक, अगर आप तीन से ज्यादा सेल्फी एक दिन में लेते हैं तो यकीनन आप मानसिक रूप से बीमार हैं।
अपनी फोटो को खुद क्लिक करने को सेल्फी का नाम दिया गया है। आजकल सेल्फी का जबरदस्त ट्रेंड है। लेकिन यदि किसी को ज्यादा सेल्फी लेने की आदत है तो ये खुलासा होश उड़ा देगा।

एक रिसर्च में ज्यादा सेल्फी लेने की आदत को मानसिक विकार बताया गया है। साइकोलॉजिस्ट का कहना है कि ‘सेल्फाइटिस’ एक ऐसी मानसिक स्थिति है जहां लोगों को बार-बार सेल्फी लेने का मन होता है और इसे सोशल मीडिया में पोस्ट करने की भी इच्छा होती है।

सेल्फाइटिस शब्द 2014 से खोजा गया है, लेकिन अभी भी ये विज्ञान की दुनिया से दूर है। नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी और थियागरराजर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के रिसर्चर्स ने इस टर्म की जांच की और छह मोटिवेटिंग फैक्टर्स भी ढूंढ निकाले। एक्सपर्ट्स ने किसी इंसान की स्थिति जानने के लिए सेल्फाइटिस बिहेवियर स्केल बनाया।


रिसर्चर्स ने इस डिस्ऑर्डर के बारे में जांच तब शुरू की जब ऐसी ही टेक्नोलॉजी संबंधी बीमारी नोमोफोबिया पर स्टडी की जा चुकी थी। ये ऐसी स्थिति जहां इंसान को मोबाइल फोन हाथ में ना होने का फोबिया होने लगता है।

सेल्फाइटिस की स्टडी के दौरान भारत से 200 उम्मीदवारों को लिया गया। क्योंकि फेसबुक में भारत के काफी यूजर्स हैं और खतरनाक जगहों में सेल्फी लेने के दौरान मौत भी यहां सबसे ज्यादा हुई है। इन सभी को सेल्फाइटिस बिहेवियर स्केल पर जांचा गया।

नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में बिहेवियर एडिक्शन के प्रोफेसर डॉ. मार्क ग्रिफिथ्स ने कहा कि, कुछ साल पहले मीडिया में ऐसी खबरें आई जिसमें दावा किया गया कि सेल्फाइटिस की कंडीशन को अमेरिकन साइकैट्रिक असोसिएशन ने मेंटल डिस्ऑर्डर माना है।

हालांकि बाद में ये रिपोर्ट फेक निकली। लेकिन इसका मतलब ये नहीं था कि सेल्फाइटिस की कंडीशन मौजूद नहीं थी। रिसर्चर्स ने अब इस कंडीशन के होने की पुष्टि की है। रिसर्चर्स का कहना है कि अब चूंकि इस कंडीशन के अस्तित्व में होने की पुष्टि की जा चुकी है तो आगे इसमें रिसर्च की जाएगी। साथ ही कई और जानकारियां भी सामने आएंगी।

पहचानिए खुद को
अमरीकन साइकेट्रिक एसोसिएशन ने सेल्फी लेने की बीमारी को सेल्फीटिस का नाम दिया है। जिसके मुताबिक, यह बीमारी एक ऐसी सनक है, जिसमें व्यक्ति पागलपन की हद तक अपनी फोटो लेने लगता है और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है। ऐसा करने से धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास खत्म हो जाता है, उसकी निजता पूरी तरह से भंग हो जाती है और वह एंजाइटी का शिकार इस कदर हो जाता है कि आत्महत्या करने तक की सोचने लगता है।
एसोसिएशन ने इस बीमारी को 3 स्तरों में बांटा है…

बॉर्डरलाइन
अगर आप हर रोज 3 सेल्फी लेते हैं, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करते।
एक्यूट
अगर आप हर रोज कम से कम 3 सेल्फी
सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं।
क्रॉनिक
सेल्फी लेने पर कोई नियंत्रण नहीं है और आप रोज 6 फोटो तक पोस्ट करते हैं।

खुद से करने लगते हैं नफरत
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जरूरत से ज्यादा सेल्फी लेने की चाहत बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर नाम की बीमारी को जन्म दे सकती है। जिसमें लोग मानने लगते हैं कि वे अच्छे दिखाई नहीं देते। उन्हें अपने शरीर के उन कथित दोषों को ठीक करना चाहिए और इससे भी अच्छा उनके लिए यही होगा कि वे लोगों से बच कर रहें, उनसे मिले-जुले ही न। लाइक्स न मिलने पर वे यह भी मानने लगते हैं कि उनमें बहुत ज्यादा खराबी है, धीरे-धीरे ऐसे लोग गहरे अवसाद में चले जाते हैं। कॉस्मेटिक सर्जन्स भी मानते हैं कि कैमरा फोन के आविष्कार से कॉस्मेटिक सर्जरी करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। लोग अक्सर अपने चेहरे को खूबसूरत और सेल्फी के मुताबिक बनाने की चाहत में उन तक आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *