September 17, 2021
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शिवशंकर पैंकरा की मदद को वरदान मान समाज ने बच्चे का नामकरण करवाया,विधायक ने बच्चे का नाम गुलशन रखा

शिवशंकर पैंकरा की मदद को वरदान मान समाज ने बच्चे का नामकरण करवाया,विधायक ने बच्चे का नाम गुलशन रखा


हरित छत्तीसगढ़ नीरज गुप्ता रायपुर।।

आपने आज तक बच्चे के जन्म के पहले उसके नाम को लेकर मां-बाप को ज्योतिषी या घर के बड़े-बुजुर्गों से राय लेते देखा होगा। वही जशपुर जिले के पत्थलगांव के ग्राम पंगसुवा में बच्चे का नाम गांव वालों और परिजनों ने स्थानीय विधायक से नामकरण करवाया। दरअसल उस समाज के लोग विधायक द्वारा किये गए पहल का आभार किस तरह जताए उनकी समझ मे नही आ रहा था जहां नागवंसी समाज के ऐतिहासिक रैली निकाली वही समाज के एक घर मे जन्मे नवजात शिशु का नामकरण भी करवाया।बताया जाता है कि यह समाज बरसो से मात्रात्मक त्रुटि की वजह से जाति प्रमाण पत्र का लाभ लेने से वंचित था विधायक की पहल से शाब्दिक व उच्चारण की गड़बड़ी का हल निकल जाने के बाद नागवंशी समाज के लोगों ने स्वागत रैली निकाल कर खुशी जताई। वही इस मदद को वरदान मान रहे लोगों के आग्रह पर ग्राम पंचायत पंगसुवा में नवजन्मे बच्चे का नामकरण किया संसदीय सचिव शिवशंकर पैंकरा ने बच्चे का नाम गुलशन नाग रखा,तथा बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।।इस अवसर पर संसदीय सचिव श्री पैकरा ने ग्रामीणों के विकास के लिए लगातार काम करने का आश्वासन दिया। समाज की रैली में संसदीय सचिव शिवशंकर पैकरा ने कहा नागवंशी समाज के लोगों की इस जटिल समस्या का निराकरण हो जाने से छात्रों को शैक्षणिक काम में रुकावट की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। संसदीय सचिव को समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया था।
नागवंशी समाज के प्रदेश महासचिव आनंद नाग और लंबोदर नाग का कहना था कि जाति के मामले की इस जटिल समस्या का निराकरण हो जाने से इस समाज के बच्चों को शैक्षणिक और अन्य काम में अब रुकावट की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके पहले नागवंशी समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र के लिए शाब्दिक और उच्चारण की गड़बड़ी के चलते काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। लंबोदर नाग ने बताया कि इस समस्या का निराकरण के लिए उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपना दुखड़ा सुनाया था। पर कई साल से परिणाम मिलने की प्रतीक्षा के बाद भी उनकी मुश्किलें हल नहीं हो रही थी। पिछले दिनों मुख्यमंत्री डाॅ.रमन सिंह ने कैबिनेट की बैठक में अनुसूचित जाति के अंतर्गत 42 जाति समूह और अनुसूचित जाति के अंतर्गत 44 अधिसूचित किए गए हैं। उच्चारण भेद का निराकरण हो जाने से नागवंशी समाज के लोगों की भी मुश्किलें हल हो गई।

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