September 17, 2021
Breaking News

पुणे में तनाव,अंग्रेजों की जीत का जश्न से भड़की हिंदु-दलित हिंसा, एक की मौत, कई गाड़ियां जलाई

पुणे में तनाव,अंग्रेजों की जीत का जश्न से भड़की हिंदु-दलित हिंसा, एक की मौत, कई गाड़ियां जलाई

Dalits protest in Pune a day after clashes in Bhima Koregaon left one dead पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में अंग्रेजों की जीत का जश्न मनाने पर हिंसा भड़क उठी. हिंसा में एक की मौत हो गई है. जबकि 25 से अधिक गाड़ियां जला दी गईं और 50 से ज्यादा गाड़ियों में तोड़-फोड़ की गई. भीमा कोरेगांव में दलित संगठनों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना पर अंग्रेजों की जीत का शौर्य दिवस मनाया था.दरअशल ये शौर्य दिवस इसलिए मनाया गया था, क्योंकि 1 जनवरी 1818 में कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी. इस दिवस में कुछ संख्या में दलित भी शामिल थे. इसी बात को लेकर कई गांव के लोगों और दलितों में संघर्ष हुआ, जिसमें एक की मौत हो गई.

सीएम ने की शांति की अपील

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने लोगों से अपील की है कि वह शांति बनाए रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें. सीएम फड़णवीस ने बताया है कोरेगांव हिंसा की न्यायिक जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी जाएगी. साथ ही युवाओं की मौत के मामले में सीआईडी जांच होगी. राज्य सरकार ने मृतकों के परिवार को 10 लाख का मुआवजा देने का एलान किया है.

वहीं, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भीमा-कोरेगांव में हिंसा साजिश के तहत फैलाई गई. मुंबई कांग्रेस के डॉ. राजू वाघमारे ने कहा कि पहले से दलितों पर हमले करने की प्लानिंग थी. आरएसएस के कुछ लोग यहां हिंसा भड़काने के लिए लंबे समय से तैयार कर रहे थे.बता दें कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास उत्तर-पू्र्व में हुई थी. यह लड़ाई महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. अंग्रेजों की तरफ 500 लड़ाके, जिनमें 450 महार सैनिक थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28,000 पेशवा सैनिक थे, मात्र 500 महार सैनिकों ने पेशवा की शक्तिशाली 28 हजार मराठा फौज को हरा दिया था.

महार सैनिकों को उनकी वीरता और साहस के लिए सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में भीमा कोरेगांव में स्मारक भी बनवाया, जिन पर महारों के नाम लिखे गए. इसके बाद से पिछले कई दशकों से भीमा कोरेगांव की इस लड़ाई का महाराष्ट्र के दलित जश्न मनाते आ रहे हैं.

हर साल नए साल के मौके पर महाराष्ट्र और अन्य जगहों से हजारों की संख्या में पुणे के परने गांव में दलित पहुंचते हैं, यहीं वो जयस्तंभ स्थित है जिसे अंग्रेजों ने उन सैनिकों की याद में बनवाया था, जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई थी. कहा जाता है कि साल 1927 में डॉ. भीमराव अंबेडकर इस मेमोरियल पर पहुंचे थे, जिसके बाद से अंबेडकर में विश्वास रखने वाले इसे प्रेरणा स्त्रोत के तौर पर देखते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *