September 17, 2021
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तो क्या सही में अमेरिकी मदद नही मिलने से कंगाल हो जाएगा पाकिस्तान

तो क्या सही में अमेरिकी मदद नही मिलने से कंगाल हो जाएगा पाकिस्तान
डेस्क रिपोर्ट । अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की तरफ से पैसे की मदद रोके जाने से पाकिस्तान की इकोनॉमी को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है कहा तो यह भी जा रहा है कि इस मदद के बिना पाकिस्तान कंगाल हो जाएगा। इस मामले को लेकर यदि पुराने इतिहास को देखा जाए तो अभी तक वास्तव में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी मदद पर चलने की बात सामने आ रही थी जिससे ये साफ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की तरफ से पैसे की मदद रोके जाने से पाकिस्तान की इकोनॉमी को बड़ा झटका लगेगा. जाहिर है पाक को इतने सालों से मिल रही अमेरिकी मदद रुक जाने से पाकिस्तान के लिए फाइनेंशियल मोर्चे पर अस्तित्व को संभाल पाना एक कठिन काम होगा। यही वजह है कि अमेरिका के इस कड़े कदम के बाद पाकिस्तानी पीएम शाहिद खाकन अब्बासी ने आपातकालीन बैठक बुलाई, वहीं पाक में अमेरीकी राजदूत डेविड हेल को भी तलब किया. और अब पूरे पाकिस्तान में जगह-जगह ट्रंप के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला भी चल रहा है. यह के कडुवा सच है कि पाकिस्तान को अमेरिका से मिल रही आर्थिक मदद की भारी दरकार है क्योंकि पाक के ऊपर विदेशी कर्ज करीब 79.2 बिलियन डॉलर या 5 लाख करोड़ रुपये का है. वहीं दुनिया की 10 ऐसी इकोनॉमी को विदेशी कर्ज चुकाने में अक्षम रहेंगी और जल्दी ही डिफॉल्ट कर सकती हैं, उनमें पाकिस्तान का भी नाम शामिल है. पाकिस्तान की जीडीपी 5.28 फीसदी है और इसे ऊपर उठने के लिए भी अमेरिकी मदद की दरकार है.
पाकिस्तान की जनसंख्या विश्व की छठी सबसे बड़ी जनसंख्या है. 2016 की प्लानिंग मिनिस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक 38.8 फीसदी पाक नागरिक गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करते हैं. वही पाकिस्तान में बेरोजगारी की दर भी 6 फीसदी है.वही एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का रक्षा बजट 8. अरब डॉलर है और वह 15 साल में इस राशि से 4 गुना ज्यादा राशि आतंकवाद का खात्मा करने के नाम पर ले चुका है पर अब तक पाकिस्तान को आतंक को खत्म करने के लिए जितनी कार्रवाई करनी चाहिए थी वो उसने नहीं की और इसी बात पर अमेरिका पाक से खफा है.
अब तक जितने रुपये की मदद की उसे कर्ज में तब्दील करने को तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि पाकिस्तान के लिए चलाए जा रहे अपने विदेशी सैन्य वित्त पोषण कार्यक्रम को मदद से बदलकर वित्तीय कर्ज के दायरे में लाया जाए। यदि ऐसा होता है तो पाकिस्तान के लिए यह काफी चिंता की बात होगी। उसको यह कर्ज चुकाना होगा जिसके चलते उसकी आर्थिक हालत और खराब हो सकती है। अमेरिकी सीनेट में यह बात पहले भी कई बार सुनाई दी है कि 9/11 हमले के बाद पाकिस्तान को सुरक्षा और आर्थिक मदद के तौर पर अमेरिका ने जो 30 अरब डॉलर की सहायता दी है उसका उसे कोई फायदा नहीं हुआ है। दरअसल, पाकिस्तान गठबंधन सहायता कोष के तहत अमेरिका से मदद पाने वाला सबसे बड़ा देश है। अमेरिका ने ही पाकिस्तान को कई मामलों में आर्थिक मदद दी थी। लेकिन यहां पर डोनाल्ड ट्रम्प की सोच काफी अलग है। यहां पर यह भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को लगातार अरबों डॉलर की मदद की जाती रही है। फिर वह चाहे हक्कानी नेटवर्क को खत्म करने के लिए हो या फिर सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए। लेकिन पाकिस्तान इस मदद को हमेशा से ही दूसरे कामों में लगाता रहा है, जिसका जिक्र कई बार अमेरिकी सीनेट में भी उठा है।

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