September 24, 2021
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हाथियों द्वारा एक और मौत के बाद हंगामा,ग्रामीणों ने डीएफओ को घेरा

हाथियों द्वारा एक और मौत के बाद हंगामा,ग्रामीणों ने डीएफओ को घेरा

पप्पू जायसवाल हरित छत्तीसगढ़ ।।हाथियों द्वारा एक और मौत के बाद हंगामा,ग्रामीणों ने डीएफओ को घेरा,तनाव की स्थिति।* प्रतापपुर के ग्राम सिलफिली का मामला,ग्रामीणों को जिम्मेदार बताने से भड़का आक्रोश प्रतापपुर। वन परिक्षेत्र प्रतापपुर के ग्राम सिलफिली में जंगली हाथियों द्वारा एक व्यक्ति को मौत के घाट उतारने के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी। करीब आधे घण्टे तक रेंजर को बन्दी रखने के बाद मौके पर आए डीएफओ को ग्रामीणों ने घेर लिया और जमकर नारेबाजी की। मौत के लिए ग्रामीणों को स्वयं जिम्मेदार बताने के बाद तनाव की स्थिति निर्मित हो गयी थी,कई घण्टे के घटनाक्रम के बाद मामला शांत हुआ। बताया जा रहा है कि ग्रामीण की मौत वन कर्मियों द्वारा अपने वाहन चालू कर लाइट दिखाने और हॉर्न बजाने के बाद हाथियों के वापस लौट जाने के बाद हुई। मिली जानकारी के अनुसार करीब अट्ठाइस हाथियों का दल सिलफिली के आसपास के जंगलों में डटा हुआ था,गाँव की तरफ आने की खबर के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सोमवार की रात करीब दस बजे उन्हें अपने गाँव से बाहर खदेड़ रहे थे कि तभी सड़क की ओर खड़े वन विभाग के लोगों ने हाथियों को आते देख अपने वाहनों को स्टार्ट कर लाइट जला हॉर्न बजाना चालू कर दिया जिसके बाद अधिकांश हाथी तो सड़क पर कर गए लेकिन दो तीन हाथी वापस हो गए। उन हाथियों को तेजी से वापस आता देख ग्रामीणों में खलबली मच गई तथा सभी वहां से भागने लगे लेकिन साठ वर्ष का सोबरन उर्फ भीम कोड़ाकु हाथियों की चपेट में आ गया और हाथी ने उसे कुचल कर मार डाला। इससे पहले हाथियों ने गांव के ही बिहारी और पूरन के घरों को तोड़ दिया था,हाथियों द्वारा एक व्यक्ति की मौत और घरों को तोड़ने को लेकर रात से ही ग्रामीणों में आक्रोश था और सुबह होते ही तनाव की स्थिति निर्मित होने लगी थी। आज मंगलवार को सुबह ही प्रतापपुर पुलिस थाना प्रभारी श्री कुजूर,श्री कश्यप,श्री राजवाड़े व अन्य के साथ मौके पर पहुंच गई थी ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे जहां एसडीओ प्रभाकर खलखों,रेंजर बीएन जायसवाल व अन्य वन कर्मी पहले से ही मौजूद थे। तनाव के बीच पूरी औपचारिकता पूरी कर वन विभाग ने मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता राशि पच्चीस हजार रुपये दे दिए और पोस्टमार्टम करा शव को भी परिजनों को सौंप दिया जिसके बाद मामला शांत होते देख पुलिस और एसडीओ फारेस्ट वहां से चले गए। इस बीच रेंजर श्री जायसवाल भी वहां से जाने ही वाले थे कि ग्रामीणों ने उन्हें बन्दी बना लिया और नारेबाजी करते हुए डीएफओ को बुलाने की बात करने लगे। इसके करीब आधे घंटे बाद डीएफओ सुरजपुर बीपी सिंह मौके पर पहुंचे जिन्हें देखते ही ग्रामीण नारेबाजी करने लगे और उन्हें घेर लिया लेकिन उस तनाव पूर्ण स्थिति हो गयी जब डीएफओ ने कहा कि मौत के जिम्मेदार खुद ग्रामीण हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि नवीन जायसवाल और जिशान खान सहित अन्य ने अपनी बात रखने की कोशिश की तो डीएफओ के इस जवाब के बाद कि वे सिर्फ पीड़ित ग्रामीणों से बात करेंगे के बाद भी स्थिति और तनाव पूर्ण हो गयी और बात झगड़े तक पहुंच गई। ग्रामीणों और डीएफओ के बीच नोक झोंक के करीब डेढ़ घण्टे के बाद मामला शांत हुआ और डीएफओ ने सबके सामने अपनी बात रखते हुए उनके द्वारा किये जा रहे पहल की जानकारी दी। इस दौरान अमला,पुलिस बल के साथ नवीन जायसवाल,जिशान खान,जगत आयाम,राकेश मित्तल,त्रिभुअन सिंह,उमाशंकर पैंकरा,चंद्रशेखर सिंह,गोपाल जायसवाल,गिरधारी सिंह,सुमद राम,बसन्त पैंकरा,नसीम अंसारी सहित आसपास के पंचायतों के सरपंच,पंच व ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे। गन्ने का बढ़ता रकबा हाथियों के आने का कारण इस दौरान डीएफओ ने ग्रामीणों के समक्ष कई बातें रखीं जिनका ग्रामीणों ने पुरजोर विरोद्ध किया क्योंकि डीएफओ अपने विभाग को सही बता सारी जवाबदारी ग्रामीणों पर ही थोपने का प्रयास कर रहे थे। डीएफओ बीपी सिंह ने जहां मौत के लिए खुद ग्रामीणों को जिम्मेदार बताया वहीं कहा कि गन्ने का बढ़ता रकबा हाथियों के आने का मुख्य कारण है।उन्होंने कहा कि अब हाथियों के भोजन का टेस्ट बदल गया है और उन्हें गन्ने के साथ चावल धान और शराब भाने लगा है जिस कारण वे गाँव की ओर आ रहे हैं। जंगलों में नहीं हाथियों के लिए चारा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में हाथी जंगल में ही रहें इसलिए शासन प्रति वर्ष वन विभाग के साथ वाईल्ड लाईफ अम्बिकापुर को करोड़ों रुपए देती है । इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि जंगलों में हाथियों के लिए आवश्यक भोजन के लिए बांस वैगेरह और पानी स्त्रोतों का विकास करे लेकिन कमाल की बात है कि मौके पर डीएफओ ने कहा कि जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त चारा नहीं है जिस कारण हाथी भूख मिटाने गाँव की ओर आते हैं। जब जनप्रत्तिनिधियों ने पूछा कि फिर शासन से मिलने वाला पैसा कहां जाता है

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