September 24, 2021
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क्या है स्पाइक मिसाइल, जिसके बिना भारतीय सेना की ताकत पाकिस्तान के सामने कमजोर पड़ रही है,भारतीय सेना परेशान

क्या है स्पाइक मिसाइल, जिसके बिना भारतीय सेना की ताकत पाकिस्तान के सामने कमजोर पड़ रही है,भारतीय सेना परेशान

पाकिस्तान के पास भारतीय मिसाईल से दुगनी दुरी तक की मारक र्क्षमता वाली मिसाईल  ने भारतीय सेना की परेशानी बढा दी है यह मिसाईल है स्पाईक मिसाईल //////

स्पाइक मिसाइल भारत युद्ध के मोर्चे पर जिस एक जगह पकिस्तान से मात खा सकता है, वो है एंटी टैंक मिसाइल. भारत के पास फिलहाल फ़्रांस की Milan 2T मिसाइल उपलब्ध हैं. उनकी मारक क्षमता 2 किलोमीटर तक है, जबकि पाकिस्तानी लश्कर के पास चीन में बनी HJ-8 पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइल है. इसे पाक सेना ने ‘बख्तर शेख’ नाम दे रखा है. यह भारत की मिसाइल से से दोगुनी दूरी पर मार करने वाली एंटी टैंक मिसाइल हैं. इसके अलावा पाकिस्तानी इन्फेंट्री के पास अमेरिका में बनी TOW मिसाइल भी है. यह भी भारतीय एंटी टैंक मिसाइल से कहीं बेहतर है. भारतीय सेना लंबे समय से अच्छी एंटी टैंक मिसाइल की मांग कर रही थी.स्पाइक ऐसी फायर एंड फॉरगेट मिसाइल है, जो टैंको से चलते फिरते लक्ष्य को अपना निशाना बना सकती है। यह मिसाइल दागे जाने के बाद खुद-ब-खुद लक्ष्य का पीछा करती है। स्पाइक मिसाइल  का निर्माण इजराइल की राफेल एडवान्स्ड सिस्टमस करती है।बीते दिनों इस मिसाइल की पूर्ति के लिए भारत ने इजरायल कमानी के साथ करार किया था जिसके बाद यह मिसाइल भारतीय सेना के लिए उपलब्ध होना था परंतु अब भारत ने करार खतम कर दिया है

भारत ने इज़राइली कंपनी राफेल के साथ हुआ 500 मिलियन डॉलर (करीब 3,175 करोड़ रुपए) का रक्षा करार खत्म कर दिया है. इस करार के तहत राफेल भारतीय कंपनी कल्याणी ग्रुप के साथ मिलकर 1600 स्पाइक मिसाइल बनाने जा रही थी. हाल ही में राफेल ने हैदराबाद में अपने प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था. हालांकि, भारत ने राफेल के साथ 70 मिलियन डॉलर के दूसरे करार को जारी रखा है. इस करार के तहत इज़राइली कंपनी भारत को सतह से जमीन पर मार करने वाली 131 मिसाइल बनाकर देने वाली है.मिसाइल सौदे के रद्द होने की खबर भारतीय सेना ने चिंता जताई है। सेना के सूत्रों के मुताबिक मिसाइल के विकास की यह प्रक्रिया इन्फैन्ट्री फार्मेशनों पर गंभीर असर डालेगी। उनका कहना है कि इस स्वदेशी मिसाइल के विकास, परीक्षण और सेना में तैनात होने में चार साल से अधिक लगाना सेना को बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगा।

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