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जशपुर:कुडुख व आदिवासी समाज ने छग भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक को बताया असंवैधानिक,निरस्त करने राज्यपाल के नाम तहसीलदार को सौपा ज्ञापन 

हरित छत्तीसगढ़ पत्थलगांव //छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2017 को पारित करने के विरोध में सर्व आदिवासी समाज, कुडुख  समाज ने राज्यपाल के नाम पत्थलगांव तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। संविधान की रक्षा और आदिवासी समुदाय के भारत का संविधान ने प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता संसोधन विधेयक 2017 को अनुमोदित नहीं करने और इस विधेयक को निरस्त करने की मांग की। इस दौरान याकूब कुजूर, पास्कल पन्ना,सुरेन्द्र तिर्की,आनन्द नाग,टिकेश्वर एक्का , मंत्री लकडा,तिरपन एक्का,प्रकाश मिंज,पटेल टोप्पो,सुरेन्द्र एक्का,नेहरु लकडा,जोसेफ बड़ा समेत कुडुख  समाज व आदिवासी समाज से जुड़े कई पदाधिकारी  उपस्थित थे /इस मौके पर कुडुख व आदिवासी समाज के लोगों ने बताया कि 21 दिसंबर को छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता संसोधन विधेयक 2017 पारित किया गया, जिसके अनुसार छग भू राजस्व संहिता, 1959 (क्र.20 सन्‌ 1959) की धारा 165 में,उपधारा (6)में, खंड (दो) मे ख मे प्रथम ‘परंतुक’शब्द स्थापित किया गया है, आपसी सहमति से राज्य शासन आदिम जाति आदिवासी की भूमि को क्रय कर सकेगा। समाज का कहना है कि विधेयक में आदिवासियों की जमीन सरकार आसानी से खरीद सकती है। ऐसे विधेयक का आदिवासी समाज कड़ा विरोध करता है और इस संविधान के इन अधिकारों में परिवर्तन सविधान ने प्रदत्त मौलिक अधिकारों के मूल भावना के विपरीत है। इसलिए यह विधयेक पास नहीं होना चाहिए। संविधान की रक्षा और आदिवासी समुदाय के भारत का संविधान ने प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए छग भुराजस्व संहिता संसोधन विधेयक 2017 को अनुमोदित नहीं करने और इस विधेयक को निरस्त करने की मांग की है।समाज का कहना है कि विधेयक में आदिवासियों की जमीन सरकार आसानी से खरीद सकती है। ऐसे विधेयक का आदिवासी समाज कड़ा विरोध करता है। 

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