September 17, 2021
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रायपुर रेल मंडल ने अपनी ट्रेनों के 94 कोचों में 356 बायो टॉयलेट लगाये

रायपुर रेल मंडल ने अपनी ट्रेनों के 94 कोचों में 356 बायो टॉयलेट लगाये

बायो टॉयलेट की रेल गाथा

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर-रेलपथों और स्टेशनों को गंदगी व बदबू से निजात दिलाने के लिए भारतीय रेल के सवारी डिब्बो में जैविक शौचालय लगाये जा रहे हैं। जो वातावरण के अनुकूल है और हरित विकास की ओर अग्रसर है।
भारतीय रेल के कोचों में पूर्व के ओपन डिस्चार्ज प्रणाली के शौचालय लगाये गए थे जिसमें मल-मूत्र रेलपथों के उपर गिरता था । इस समस्या को ध्यान में रखकर भारतीय रेल और डी. आर. डी. ओ. (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने साथ मिलकर यात्री कोचों के लिए पूरे विश्व में अनोखी बायो-टॉयलेट प्रणाली को विकसित किया है । बायो-टॉयलेट टैंक को कोच के अंडर फ्रेम में लगाया गया है एवं इसी टैंक में बेक्टेरिया द्वारा मल-मूत्र को नष्ट करके हानिरहित पानी बाहर निकाला जाता है। इस स्टील टैंक की संरचना कुल 06 भागो में की गयी है। जिससे कि बायो दिग्रीषण सफलतापूर्वक हो। इस टैंक के निर्माण में स्टील की आधार प्लेट, अलग अलग खंड वाले प्लेट, बॉल वाल्व और पी ट्रैप का उपयोग किया गया है तथा टॉयलेट पैन को रबर ट्युब के साथ जोड़कर लगाया गया है। रेल यात्रियों द्वारा टॉयलेट के उपयोग के पश्चात् उत्सर्जित मल मूत्र पी ट्रैप पाइप के माध्यम से टैंक के अंदर जाता है तथा टैंक में पूर्ण रूप से भरे हुए बेक्ट्रिया कल्चर (इनोकुलुम) के द्वारा मल मूत्र को बायोलॉजिकल पद्धति के द्वारा नष्ट कर दिया जाता है मल मूत्र को टैंक में ही साधारण पानी और गैस में परिवर्तित कर दिया जाता है। बायो दिग्रीषण में उत्पन्न गैस टैंक से बाहर निकल जाती है और हानिरहित पानी क्लोरिन चेम्बर से होकर बहार निकल जाता है। वर्तमान में रायपुर मंडल द्वारा लगभग 94 कोचों में 356 बायो टायलेट लगाये जा चुके है, शेष कोचों में प्रक्रिया जारी है।
रेल यात्रियों से अपेक्षाएं है कि यात्रियों द्वारा बोतल, चाय के कप, कपडे, नेपकिन, पोलिथीन व गुटखा पाउच इत्यादि को टॉयलेट पैन में डालने के कारण बायो-टॉयलेट जाम हो जाता है। तथा सुचारू रूप से कार्य नहीं करता है । अतः कृपया शौचालय में बोतल, चाय के कप, कपडे, नेपकिन, पोलिथीन व गुटखा पाउच इत्यादि ना डाले । हर बायो-टॉयलेट टैंक के कोच के टॉयलेट में एक डस्टबिन भी रखा गया है जिसमें कूड़े इत्यादि को डाला जा सकता है। बायो-टॉयलेट का उपयोग सुचारू रूप से कर रेलवे का सहयोग करें।


बायो-टॉयलेट के टैंक से निकलने वाले एफलुयेंट की जाँच प्रत्येक तीन माह के अंतराल में किया जाता है और उससे यह सुनिश्चित किया जाता है की बेक्ट्रिया कल्चर (इनोकुलुम) ठीक तरीके से कार्य कर रहा हैं इसके पैरामीटर्स निम्नलिखित है।
1. पीएच मानक परीक्षण – टारगेट वैल्यू 6-9 पीएच
2. टोटल सॉलिड परीक्षण- टारगेट वैल्यू -675एमजी/100एमएल
3. टोटल डिसोल्वड़ सॉलिड़ परिक्षण- टारगेट वैल्यू -350एमजी/100एमएल
4. टोटल वोलेटाइल सॉलिड परीक्षण – टारगेट वैल्यू -475एमजी/100एमएल
5. केमिकल ऑक्सीजन डिमांड परीक्षण- टारगेट वैल्यू -1800एमजी ओ2/लीटर.
6. फिकल कौली फॉर्म्स काउंट- टारगेट वैल्यू 108 सीएफयू/100एमएल

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