October 21, 2021
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पंथ-संप्रदाय नही, भारत का चेहरा उसकी संस्कृति है : मोहन भागवत

पंथ-संप्रदाय नही, भारत का चेहरा उसकी संस्कृति है : मोहन भागवत 
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक  मोहन भागवत ने मकर संक्रांति उत्सव को संबोधित किया
रायपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक  मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता का मूलमंत्र बताते हुए कहा है कि सुख की चाह में हम जो बटोर रहे हैं, उसमें से जरूरतमंदों को कुछ बांटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत का चेहरा कोई पंथ या संप्रदाय नही हो सकता बल्कि संस्कृति ही हमारी पहचान है। उपरोक्त विचारों को हम आत्मसात करेंगे तो दुनिया की कोई ताकत हमें अलग नही कर सकती, हरा नही सकती। वर्तमान में दुनिया की निगाहें भारत की ओर हैं।
 
सरसंघचालक  मोहन भागवत , स्थानीय विज्ञान महाविद्यालय के प्रांगण में मकर संक्रांति उत्सव पर उपस्थित स्वयंसेवकों तथा नागरिकगणों को संबोधित कर रहे थे। उदबोधन की शुरूआत मकर संक्रांति के पर्व का महत्व बताते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि प्रकृति भी अपना स्वभाव सृष्टि के हित में बदलती है, हमें भी अपना स्वभाव गरीबों के हित में बदलना चाहिए जैसे जरूरतमंदों की दान देकर मदद करना। बच्चों से दान देने की आदत डालनी चाहिए। श्री भागवत जी ने आगे कहा कि दुनिया में इन दिनों अपने-अपने पंथ और संप्रदाय को ही सर्वोपरि बताने की प्रवृति बढ़ी है जो गलत और अस्वीकारणीय है। भारत में भी अनेक जातियां, बोलियां और देवी-देवता हैं लेकिन वह हमारी पहचान नही है। ४० हजार सालों से भारत की पहचान उसकी संस्कृति, उसके पूर्वज हैं।
 
सरसंघचालक  ने आगे कहा कि आदिवासी भी हमारे अपने हैं। उनका सर्वस्व विकास करने तथा अपने साथ लेकर चलने की चिंता भारतीय समाज को करनी चाहिए। श्री भागवत जी ने सावधान किया कि जब-जब हम भारत की लिए लड़े, हमारी एकता कायम रही, हमें कोई जीत नही सका लेकिन जैसे-जैसे हम पंथ, संप्रदाय, भाषा इत्यादि को लेकर लडऩे लगे, हमारा देश टूटने लगा। हमें हमारे पूर्वजों पर अभिमान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति तोड़ती है लेकिन समाज और संस्कृति व्यकित को जोड़ती है।
 
कार्यक्रम की अध्यक्षता सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष श्मोहन सिंह टेकाम ने की। अपने संक्षिप्त उदबोधन में उन्होंने रानी दुर्गावती को याद करते हुए कहा कि राष्टहित में आदिवासियों ने हमेशा अपना बलिदान दिया है लेकिन आज वह उपेक्षित और शोषित बना हुआ है। नतीजन बस्तर के भोले-भाले आदिवासियों को राष्ट्रविरोधी शकितयां बरगला रही हैं लेकिन वे अपने मंसूबे में कामयाब नही हो सकती।  
 
सामाजिक समरसता सममेलन की शुरूआत स्वयंसेवकों द्वारा व्यक्तिगत, सामूहिक गीत, सुभाषित व घोष-दल की प्रस्तुतियों से हुई। मुखय उदबोधन के पूर्व महानगर संघचालक श्री उमेश अग्रवाल ने मंच पर उपस्थित अतिथियों का स्वागत पुस्तकें देकर किया तत्पश्चात महानगर कार्यवाह श्री टोपलाल वर्मा ने अतिथियों का परिचय दिया। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्र संघचालक श्री अशोक सोनी जी, प्रांत संघचालक श्री बिसरा राम यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख श्री अरूण कुमार, अ.भा.कार्यकारिणी सदस्य श्री हस्तीमल, क्षेत्र प्रचारक श्री अरूण जैन जी, क्षेत्र कार्यवाह श्री माधव विद्वांस, प्रांत सह संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सकसेना, सह-क्षेत्र प्रचारक श्री दीपक विस्पुते, प्रांत प्रचारक श्री प्रेम सिदार, वरिष्ठ प्रचारक श्री शांताराम सर्राफ तथा प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. सुरेन्द्र उपस्थित थे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारणwww.facebook.com/vskchhattisgarh/ पर लाइव किया गया. 

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