जशपुर को बदनाम करने की कोशिश नाकाम, ठगी का आरोप लगाने वालों पर अग्रवाल बंधुओं पर FIR

नीरज गुप्ता संपादक मो न-9340278996

ठगी का आरोप लगाने वालों पर ही FIR, मामले में बड़ा मोड़27.85 लाख की शिकायत के बाद 70 लाख की हेराफेरी उजागर, अग्रवाल बंधुओं की जमानत याचिका खारिज

पत्थलगांव। सप्लाई कार्य दिलाने के नाम पर लगभग 27 लाख 85 हजार रुपये की ठगी का आरोप लगाकर जशपुर जिले के भाजपा नेताओं एवं मुख्यमंत्री के गृह जिला जशपुर को विवाद में घसीटने वाले मामले में अब चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है।

पुलिस जांच के बाद आरोप लगाने वाले पक्ष के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार सूरजपुर की फर्म मे. आशा स्टील एंड फेब्रीकेशन एवं मे. श्याम इंडस्ट्रीज द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि जशपुर जिले के भाजपा नेताओं व कुछ हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के नाम पर सप्लाई कार्य दिलाने का झांसा देकर कुल 27,85,000 की ठगी की गई है।हालांकि पुलिस जांच के दौरान तथ्यों के उलट संकेत मिलने के बाद पत्थलगांव थाने में आरोपकर्ता के खिलाफ ही FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पत्थलगांव निवासी आलोक गर्ग की शिकायत पर सूरजपुर निवासी रितेश अग्रवाल एवं हिरेश अग्रवाल के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) एवं 318(4) के तहत की गई है।

आरोपी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और उनकी तलाश जारी है।पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में यह सामने आया है कि जिस तरह से जशपुर जिले के सम्मानित भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के गृह जिले को सीधे तौर पर आरोपों में घसीटा गया, वह पूर्व नियोजित साजिश की ओर इशारा करता है। अब यह मामला केवल लेन-देन तक सीमित न रहकर राजनीतिक छवि धूमिल करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।शिकायत के अनुसार आलोक गर्ग से रितेश अग्रवाल एवं हिरेश अग्रवाल द्वारा व्यवसायिक लेन-देन, चेक भुगतान, बैंक खातों के माध्यम से ट्रांजैक्शन और वसूली की मांग की गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि कथित लेन-देन से पूर्व दोनों पक्षों के बीच व्यवसायिक साझेदारी और सरकारी सप्लाई कार्य जुड़े हुए थे, जिस दौरान आलोक गर्ग से लगभग 70 लाख रुपये की हेराफेरी किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।पुलिस की प्रथम दृष्टया जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ठगी व वसूली के आरोप लगाने वाला पक्ष ही पीड़ित आलोक गर्ग से 70 लाख की धोखाधड़ी का दोषी पाया गया, जिसके चलते BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस सभी पहलुओं की गहन विवेचना कर रही है।मामले से जुड़े तथ्यों में बैंक ट्रांजैक्शन, चेक, व्हाट्सएप संदेश एवं लिखित दस्तावेज़ को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। जानकारों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से न केवल जशपुर जिले की साख को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया, बल्कि भाजपा नेताओं को बदनाम करने की कोशिश भी सामने आई है, जो अब पुलिस कार्रवाई के बाद सवालों के घेरे में आ गई है।बताया जा रहा है कि सूरजपुर निवासी अग्रवाल बंधुओं द्वारा दायर जमानत याचिका को न्यायालय ने खारिज कर दिया है, जिसके बाद उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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