साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनीं सीता बाई

स्व-सहायता समूह की ताकत से बदली जिंदगी

रायपुर,स्व-सहायता समूह की ताकत से बदली जिंदगी

मजबूत हौसले और सही मार्गदर्शन से साधारण परिस्थितियों में भी सफलता की नई राह बनाई जा सकती है। छत्तीसगढ राज्य के मनेन्द्रगढ-चिरमिरी-भरतपुर जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के संकुल केल्हारी अंतर्गत ग्राम चरवाही की निवासी श्रीमती सीता बाई ने अपने प्रयासों और स्व-सहायता समूह की शक्ति से यही कर दिखाया है। कभी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने वाली साधारण गृहिणी आज बिहान – छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एन आर एल एम )के सहयोग से आत्मनिर्भर बनकर गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।

बिहान योजना से जुड़कर बदली जीवन की दिशा

विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम चरवाही में शिव शंकर महिला स्व-सहायता समूह का गठन 23 जनवरी 2018 को बिहान योजना के अंतर्गत किया गया था, जिसमें 10 महिलाएं सदस्य के रूप में जुड़ीं। विकासखंड मिशन प्रबंधन इकाई के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के माध्यम से समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया। इसी दौरान सीता बाई भी समूह से जुड़ीं और प्रारंभ में समूह की अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।

किराना दुकान, मुर्गी पालन और सेंट्रिंग प्लेट से बढ़ी आय

समूह को प्राप्त आरएफ और सीआईएफ राशि में से लगभग 60 हजार रुपये की सहायता लेकर सीता बाई ने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। धीरे-धीरे दुकान अच्छी तरह चलने लगी और यह उनके लिए स्थायी आय का साधन बन गई। दुकान से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की आय होने लगी, जिसमें करीब 6 हजार रुपये शुद्ध लाभ मिलता है।

श्रीमती सीता बाई ने इसके साथ ही मुर्गी पालन और सेंट्रिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया। इन गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय होने लगी। इस प्रकार अपनी मेहनत और लगन से सीता बाई ने आजीविका के कई स्रोत विकसित कर लिए।

समूह की शक्ति से मिली आर्थिक मजबूती

शिव शंकर महिला स्व-सहायता समूह को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 15 हजार रुपये की आरएफ राशि, 60 हजार रुपये की सीआईएफ राशि तथा 3 लाख रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इसी सहयोग से समूह की महिलाओं ने अपने-अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ीं। सीता बाई ने भी अपने व्यवसाय में लगभग 80 हजार रुपये का निवेश कर मजबूत आजीविका आधार तैयार किया।

“लखपति दीदी” बनकर बनीं प्रेरणा

आज सीता बाई अपनी किराना की दुकान, मुर्गी पालन और सेंट्रिंग प्लेट के माध्यम से लगभग 1.60 लाख रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। कभी साधारण गृहिणी के रूप में जीवन बिताने वाली सीता बाई आज गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वे अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं। सीता बाई का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार के लिए जो सपना देखा था, वह मेहनत, आत्मविश्वास और समूह के सहयोग से साकार हुआ है।

 “बिहान” योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान से भरा नया जीवन भी दिया। सीता बाई की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और सामूहिक सहयोग मिले तो वे न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।

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