खंडन से सफाई तक: कोतबा स्कूल के अध्यक्ष पद विवाद में नया मोड़, अब अभिभावकों का पलटवार

नीरज गुप्ता संपादक मो न-9340278996

शासन के नियमों, राजनीतिक हस्तक्षेप और प्राचार्य के स्पष्टीकरण के बाद गरमाई सियासतकोतबा, जशपुर। पीएम श्री शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, कोतबा में विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। पहले एक समाचार प्रकाशित हुआ, उसके बाद विद्यालय प्रशासन की ओर से उसका खंडन जारी किया गया और बाद में स्वयं प्राचार्य ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए तथ्यात्मक भ्रम की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद अभिभावकों और संबंधित पक्षों ने भी अपना पक्ष सामने रखा है।

मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब एक समाचार में पीतांबर साय पैंकरा को विद्यालय प्रबंधन समिति का नवमनोनीत अध्यक्ष बताते हुए उनका वक्तव्य प्रकाशित किया गया। इसके बाद विद्यालय प्रशासन की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस दावे को भ्रामक बताया गया। हालांकि, बाद में पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य जे.के. सिदार ने स्पष्ट किया कि समाचार पढ़ते समय उन्हें तथ्यात्मक भ्रम हो गया था। उन्होंने बताया कि पीतांबर साय पैंकरा पीएम श्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय की नहीं, बल्कि शासकीय कन्या हाई स्कूल, कोतबा की विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। इसी गलतफहमी के कारण प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी।दूसरी ओर, अभिभावक प्रतिनिधियों और संबंधित पक्ष ने दावा किया है कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विधिवत बैठक आयोजित की गई थी। बैठक के दौरान कई अभिभावकों से मोबाइल फोन के माध्यम से भी चर्चा की गई थी, जिसके बाद सर्वसम्मति से पीतांबर साय पैंकरा को अध्यक्ष मनोनीत किया गया था। अभिभावकों का कहना है कि बिना संपूर्ण तथ्यों को सामने लाए समाचार का खंडन जारी कर दिया गया, जिससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन से संबंधित दस्तावेजों और बैठक की कार्यवाही को सार्वजनिक करने की मांग की है।

शासन के नियमों पर भी उठे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच शासन के दिशा-निर्देशों की भी चर्चा शुरू हो गई है। नियमानुसार विद्यालय प्रबंधन समिति में केवल उन्हीं अभिभावकों को शामिल किया जाता है, जिनके बच्चे संबंधित विद्यालय में अध्ययनरत हों। इसी नियम के आधार पर दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से बढ़ा विवादइस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। अभिभावकों के एक वर्ग का आरोप है कि बाहरी हस्तक्षेप के कारण विवाद और गहरा गया है। इधर, संबंधित पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि समिति और उसके पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।अब यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर चर्चा और बहस का विषय बन गया है।

प्रमुख बिंदु

पहले समाचार प्रकाशित हुआ।उसके बाद विद्यालय प्रशासन ने खंडन जारी किया।प्राचार्य ने बाद में तथ्यात्मक भ्रम स्वीकार किया।अभिभावकों ने अध्यक्ष के मनोनयन को वैधानिक बताया।विद्यालय प्रबंधन समिति के नियमों को लेकर सवाल उठे।राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से मामला और गरमा गया।

नीरज गुप्ता संपादक मो न-9340278996

हरित छत्तीसगढ़ विशेष रिपोर्ट

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