फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना से गेंदा उत्पादन को मिला बढ़ावा
फसल विविधीकरण से उद्यानिकी खेती को दिया गया व्यावसायिक स्वरूप
रायपुर,

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी और पुष्प उत्पादन को अपनाना अब किसानों के लिए आमदनी के नए रास्ते खोल रहा है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के ग्राम मोहड़ के कृषक श्री घनश्याम साहू ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए पुष्प उत्पादन के साथ सब्जी फसलों का एक शानदार विविधीकृत मॉडल विकसित किया है। रा.पो. फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना (वर्ष 2026-27) से जुड़कर उन्होंने अपनी खेती में एक नई मिसाल पेश की है।
*विविधीकृत खेती का मॉडल*
श्री साहू वर्तमान में कुल 4.83 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे हैं। गेंदा फूल की 1 हेक्टेयर (रा.पो. फ्लोरीकल्चर हब प्रोत्साहन योजना के तहत, खीरा 1.62 हेक्टेयर में, मिर्च 0.81 हेक्टेयर में, कुंदरू 0.40 हेक्टेयर में, लौकी की खेती 1 हेक्टेयर में कर रहे हैं।
*बाजारोन्मुखी दृष्टिकोण*
एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने अलग-अलग पुष्प एवं सब्जी फसलों को अपनाकर अपनी खेती को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया है। गेंदा फूल की धार्मिक, सामाजिक और विभिन्न मांगलिक आयोजनों में लगातार मांग बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर, खीरा, मिर्च, कुंदरू और लौकी जैसी सब्जियों की स्थानीय बाजारों में नियमित खपत होती है। इस समन्वित उत्पादन के जरिए उन्हें बाजार की अलग-अलग आवश्यकताओं से जुड़ने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है।
उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में वे भूमि की तैयारी, पौध स्थापना, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन कर रहे हैं। श्री घनश्याम साहू की यह पहल साबित करती है कि उपलब्ध भूमि का योजनाबद्ध उपयोग करके उद्यानिकी खेती को अधिक लाभदायक और व्यावसायिक बनाया जा सकता है, जो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी है।
