कच्चे मकान की मुश्किलों से मिली मुक्ति : पक्के घर में संवर रही खोरबाहरीन बाई की जिंदगी

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से साकार हुआ वर्षों पुराना सपना,परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना और सम्मानजनक जीवन का आधार

रायपुर, 

कभी कच्चे मकान में मौसम की मार और असुरक्षा के बीच जीवन गुजारने वाली धमतरी जिले के ग्राम गंगरेल की श्रीमती खोरबाहरीन बाई आज अपने पक्के घर में परिवार के साथ सुकून से रह रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उनके वर्षों पुराने सपने को साकार कर जीवन में नई उम्मीद जगाई है।
       धमतरी विकासखंड की ग्राम पंचायत गंगरेल निवासी श्रीमती खोरबाहरीन बाई का जीवन अनेक चुनौतियों से गुजरा है। उनके पति श्री फूलचंद ध्रुव कई वर्ष पहले घर से चले गए थे, जिनके बारे में आज तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। वर्तमान में वे अपने पुत्र और दो नातियों के साथ रहती हैं।
       सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण पक्का मकान बनवाना उनके लिए संभव नहीं था। कच्चे घर में बरसात के दौरान नमी और बारिश से परेशानी होती थी। मकान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती थी। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके लिए सहारा बनी। योजना के अंतर्गत आवास स्वीकृत होने और निर्माण पूर्ण होने से परिवार को अपना पक्का घर मिल गया।
       नए आवास ने परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अब मौसमी परेशानियों की चिंता कम हुई है और बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिला है। स्थायी आशियाना मिलने से परिवार अधिक निश्चिंत होकर जीवन व्यतीत कर रहा है।
      अपनी खुशी व्यक्त करते हुए श्रीमती खोरबाहरीन बाई कहती हैं कि पक्का घर मिलने से अब मेरा परिवार सुरक्षित महसूस करता है। अपने पुत्र और नातियों के साथ एक छत के नीचे सुकून से रहने का जो सपना था, वह आज पूरा हो गया है।
       खोरबाहरीन बाई की कहानी बताती है कि पक्का आवास केवल बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से मिला उनका नया घर वर्षों के संघर्ष के बाद जीवन में आई स्थिरता और खुशियों का प्रतीक बन गया है।

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