अंतर-राज्यीय कृषि सहयोग की मिसाल

झारखंड के कृषकों ने सीखी उन्नत एवं जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकें

रायपुर, 

झारखंड के कृषकों ने सीखी उन्नत एवं जलवायु अनुकूल खेती की तकनीकें

कृषि क्षेत्र में नवाचारों के आदान-प्रदान एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से झारखंड राज्य के रांची जिले के कृषकों के एक दल ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का अंतर-राज्यीय अध्ययन भ्रमण किया। यह पहल राज्यों के मध्य तकनीकी सहयोग एवं अनुभव साझेदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

        भ्रमण के दौरान कृषक दल ने पाटन विकासखंड के ग्राम करगा का दौरा कर बिना जुताई (जीरो टिलेज) पद्धति से गेहूं उत्पादन एवं अधिक तापमान सहनशील उन्नत किस्म ‘कनिष्का’ के प्रदर्शन का अवलोकन किया। साथ ही असिंचित क्षेत्रों में धान कटाई उपरांत खेत की नमी का उपयोग करते हुए उतेरा पद्धति से तिवड़ा की खेती तथा मेड़ पर कम अवधि वाली ‘राजेश्वरी फूले’ अरहर की खेती की तकनीक का निरीक्षण किया। स्थानीय प्रगतिशील कृषकों से संवाद कर दल ने कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

        कृषक दल ने कृषि विज्ञान केंद्र, पाहंदा (अ) का भी भ्रमण किया, जहाँ वैज्ञानिकों द्वारा धनिया, तिवड़ा, चना, सरसों एवं हल्दी की वैज्ञानिक खेती, कम लागत आधारित वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा उद्यानिकी नर्सरी प्रबंधन के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। किसानों ने जैविक एवं संसाधन-संरक्षण आधारित तकनीकों में विशेष रुचि व्यक्त की।

        भ्रमण कार्यक्रम में झारखंड कृषि विभाग से श्री विकास कुमार उपस्थित रहे। तकनीकी मार्गदर्शन हेतु कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय जैन, डॉ. कमल नारायण वर्मा, डॉ. ललिता रामटेके, डॉ. आरती टिकरिहा, श्रीमती सृष्टि तिवारी एवं कु. हर्षना चंद्राकर ने किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की।

        झारखंड के कृषकों ने इस अध्ययन भ्रमण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्राप्त तकनीकों को अपने क्षेत्रों में लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह पहल राज्यों के मध्य ज्ञान एवं नवाचार के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित कर कृषि क्षेत्र को अधिक सुदृढ़ एवं लाभकारी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

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