
रायपुर। सवर्ण समन्वय समिति के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित यूजीसी कानून पर पुनर्विचार करते हुए उसे वापस लेने की मांग को लेकर माननीय लोकपाल एवं कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में समाज के विभिन्न मुद्दों और मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया।समाजसेवी डॉ. अजय त्रिपाठी ने बताया कि यूजीसी से संबंधित प्रस्तावित कानून को लेकर सवर्ण समाज में गंभीर चिंता व्याप्त है। उन्होंने कहा कि यह कानून सामाजिक न्याय और भेदभाव को समाप्त करने की भावना से बनाया गया है, जिसका समाज सम्मान करता है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है।उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार प्रदान करता है। संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुसार सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं, जबकि अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। वहीं अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है। ऐसे में किसी भी कानून को लागू करते समय समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर सामान्य वर्ग के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों का भी पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है।ज्ञापन में यह भी कहा गया कि विगत वर्षों में देश के कई हिस्सों में एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के कुछ मामलों में दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई हैं। कई बार निर्दोष लोगों को कानूनी प्रक्रिया, सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है, जिससे समाज में अविश्वास और तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है।समिति ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि सभी जातियों और वर्गों के लिए समान न्याय और संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित करना है।सवर्ण समन्वय समिति ने प्रधानमंत्री से निम्न मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया—प्रस्तावित यूजीसी बिल को वापस लिया जाए।केंद्र सरकार द्वारा घोषित 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण को राज्य में तत्काल लागू किया जाए और सीटें आरक्षित की जाएं।एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त प्रावधान बनाए जाएं तथा झूठे आरोप लगाने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए।

सवर्ण समाज की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखते हुए सवर्ण आयोग का गठन किया जाए।इस अवसर पर एंड सोसाइटी के प्रमुख हरीश कपूर ने कहा कि सवर्णों की समस्याओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार को जल्द से जल्द सवर्ण आयोग का गठन करना चाहिए। वहीं कार्यकारिणी सदस्य रमेश शुक्ला ने अनुरोध किया कि ऐसा निर्णय लिया जाए जिससे संविधान की भावना, सामाजिक समरसता और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।ज्ञापन कार्यक्रम में श्रीमती करुणा पांडेय, हिमांशु सिंह ठाकुर, रमेश शुक्ला, पंडित विमल ओझा, डॉ. उदय, राहुल सिंह परिहार, हरीश ठाकुर, समाज प्रमुख अमृत लाल और पवन जोशी सहित कई लोग उपस्थित रहे।समिति ने चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन करने के लिए सवर्ण समाज बाध्य होगा।

