
साधारण परिवार में जन्मे डॉ. हरविंदर मांकड़ ने अपने जीवन से यह साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए किसी बड़े सहारे की नहीं, बल्कि बड़े सपनों, कठोर परिश्रम और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। बिना किसी गॉडफादर के उन्होंने अपने दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना भी हर कोई नहीं कर सकता।बचपन से ही उन्हें चित्रकला, लेखन और रचनात्मक कार्यों में विशेष रुचि थी। यही रुचि आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन गई। उन्होंने हजारों कहानियाँ, लेख, चित्रकथाएँ, पटकथाएँ और संवाद लिखे। बच्चों की दुनिया में लोकप्रिय पात्रों और चित्रकथा जगत में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है।डॉ. मांकड़ ने 22 हजार से अधिक पुस्तकों का चित्रांकन कर एक दुर्लभ उपलब्धि अपने नाम की है।

उन्होंने अनेक दूरदर्शन धारावाहिकों के लिए लेखन किया तथा फिल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया। उनके द्वारा निर्देशित और निर्मित फिल्मों में “डार्क मिरर”, “खोज”, “आइसी एंड स्पाइसी”, “पंचरंगी फुकरे” तथा “यस आई एम रेशमा ग्लैम” जैसी चर्चित कृतियाँ शामिल हैं।बच्चों के प्रिय पात्र “मोटू-पतलू” की लोकप्रियता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी रचनात्मक सोच, हास्यबोध और चित्रांकन कला ने बच्चों की दुनिया को एक नई पहचान दी। आज भी लाखों बच्चे इन पात्रों से जुड़ाव महसूस करते हैं।लेखन और कला के साथ-साथ डॉ. हरविंदर मांकड़ एक प्रभावशाली प्रेरक वक्ता भी हैं। देश के विभिन्न मंचों पर उन्होंने हजारों लोगों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संघर्ष और सफलता का संदेश दिया है।

उनकी वाणी में अनुभव की गहराई और जीवन का सार स्पष्ट दिखाई देता है।सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय रहा है। उन्होंने अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उनका मानना है कि सफलता तभी सार्थक होती है, जब उसका लाभ समाज तक पहुँचे।उनके बहुमुखी योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। साथ ही उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. हरविंदर मांकड़ की जीवन यात्रा संघर्ष, समर्पण, सृजन और सफलता की प्रेरणादायक गाथा है। उनका जीवन युवाओं को यह संदेश देता है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। वे वास्तव में एक ऐसे प्रेरणा-दीप हैं, जिनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।
