किसान क्रेडिट कार्ड बना भरोसे का सहारा

खेती के लिए आसान हुआ वित्तीय प्रबंधन

रायपुर, 

खेती के लिए समय पर पूंजी की उपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। लंबे समय तक कई किसान खेती-किसानी के खर्च पूरे करने के लिए निजी साहूकारों पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना उनके लिए मजबूत आर्थिक संबल बनकर उभर रही है। गरियाबंद जिले में सुशासन तिहार के तहत आयोजित जन समस्या निवारण शिविरों में किसानों को इस योजना से जोड़ने की पहल ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

विकासखंड गरियाबंद के ग्राम आमदी में आयोजित शिविर में ग्राम भीरालाट के किसान खिलावन राम तथा ग्राम हसौदा के किसान सरजूराम और सिराधर ध्रुव को किसान क्रेडिट कार्ड सह पासबुक वितरित की गई। किसान सिराधर ध्रुव के लिए यह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि खेती को आत्मनिर्भर बनाने का नया माध्यम है। उनका कहना है कि अब उन्हें आदिम जाति सेवा सहकारी समिति से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण मिल सकेगा, जिससे खेती की जरूरतों के लिए निजी उधारदाताओं का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।

किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को फसल ऋण, खाद-बीज की खरीद, सिंचाई, कृषि यंत्रों के रखरखाव और अन्य कृषि कार्यों के लिए सरल ऋण सुविधा उपलब्ध होती है। पासबुक के माध्यम से लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच भी आसान हो जाती है। किसान क्रेडिट कार्ड किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ कृषि निवेश बढ़ाने में भी मदद कर रहा है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना किसानों के लिए आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का नया आधार बनती जा रही है।

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