GPM-Updete:-शिक्षा-विभाग के तुगलकी-फरमान के खिलाफ मुस्लिम-विकास मंच ने राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।-

शासकीय-विद्यालय में धार्मिक मंत्र या वंदना अनिवार्य रूप से शामिल करना संविधान की मूलभावना के खिलाफ:-असद सिद्दीकी।

दिनांक:-22/06/2026**मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़।।**जीपीएम/कोटा:-छत्तीसगढ़ शासन शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में धार्मिक-मंत्रों के उच्चारण एवं वंदनाओं को शामिल किए जाने जारी आदेश का विरोध जिला-स्तर में शुरू हो गया है, इसी कड़ी में सोमवार 22 जून को मुस्लिम-विकास मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने इस आदेश के विरोध में एकदिवसीय धरना प्रदर्शन करते हुए मौन रैली निकालकर राज्यपाल के नाम जिला-कलेक्टर को ज्ञापन सौंपाते हुए आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की।**शासकीय-विद्यालय में धार्मिक मंत्र या वंदना अनिवार्य रूप से शामिल करना संविधान की मूलभावना के खिलाफ:- असद-सिद्दीकी।**

मुस्लिम-विकास मंच के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गौरेला के धरना स्थल लाल बंगला से हुई..प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर शासन के आदेश के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया, इसके बाद मंच से सदस्यों द्वारा लाल बंगला से जिला-कलेक्टर कार्यालय तक मौन रैली के रूप में पहुंचे, रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संविधान में निहित-धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखने की मांग उठाई, जिला कार्यालय पहुंचकर मुस्लिम विकास मंच के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा मुस्लिम विकास मंच के अध्यक्ष असद-सिद्दीकी ने कहा कि शासकीय विद्यालय सभी वर्गों समुदायों और धर्मों के विद्यार्थियों के लिए समान रूप से शिक्षा का केंद्र हैं.

.ऐसे में किसी विशेष धार्मिक मंत्र या वंदना को विद्यालय की दैनिक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से शामिल करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं है..उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान नैतिकता और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना है..न कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा को बढ़ावा देना।**सौपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है..कि 12 जून 2026 को जारी आदेश से विभिन्न धर्मों एवं समुदायों के विद्यार्थियों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, मंच ने शासन से मांग की है कि इस आदेश पर पुनर्विचार करते हुए इसे तत्काल वापस लिया जाए साथ ही शासकीय विद्यालयों में ऐसा वातावरण बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है, जहां सभी विद्यार्थी बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समानता और सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें मुस्लिम विकास मंच ने कहा कि शिक्षा-संस्थानों की पहचान समावेशी और धर्मनिरपेक्ष होनी चाहिए तथा शासन को संविधान की मूलभावना के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।**प्रदर्शन के दौरान मंच के पदाधिकारी और सदस्य के साथ काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे..इस मौके पर मदीना मस्जिद सदर हाजी जुबैर नियाज़ी, जामा मस्जिद सदर मौलाना शहाबुद्दीन ,हुसैनी मस्जिद सदर फिरोज खान, रब मस्जिद डिपो-पारा जावेद अहमद नूरानी मस्जिद सदर गुलाम गौस हाजी सलीम सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।

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