श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन सुन भाव-विभोर हुए हजारों श्रद्धालु

दोकड़ा। श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव दोकड़ा में आयोजित पांच दिवसीय श्री जगन्नाथ कथा का द्वितीय दिवस शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा वाचक एवं छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कीर्तन गायक श्री कामता प्रसाद शरण जी ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, जन्मोत्सव तथा उनकी बाल एवं अलौकिक लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं संगीतमय वर्णन किया।

कथा का रसपान कर उपस्थित हजारों श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो गए।कथा के दौरान श्री कामता प्रसाद शरण जी ने बताया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में पड़ता है, तब भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी अत्याचार और अन्याय के अंत के लिए हुआ। उन्होंने कंस के अत्याचार, माता देवकी और वसुदेव की कारागार में पीड़ा तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य का मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कथावाचक ने वसुदेव द्वारा नवजात श्रीकृष्ण को यमुना नदी पार कर गोकुल पहुंचाने, माता यशोदा की गोद में पालन-पोषण, माखन चोरी, गोप-बालकों के साथ बाल लीलाएं, पूतना वध, कालिय नाग दमन तथा गोवर्धन धारण जैसी अनेक दिव्य लीलाओं का सजीव वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, धर्म, सत्य और लोककल्याण का संदेश देती है।

कथा के दौरान संगीतमय भजनों और मधुर कीर्तन से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा। श्रद्धालु जय श्रीकृष्ण और जय जगन्नाथ के जयघोष के साथ भक्ति रस में डूबे रहे। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ एवं श्रीकृष्ण के चरणों में सुख, शांति, समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना की।यह पांच दिवसीय श्री जगन्नाथ कथा श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा के गजपति महाराज एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के विशेष सानिध्य में आयोजित की जा रही है। प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक कथा एवं संगीतमय भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।श्री जगन्नाथ मंदिर समिति ने बताया कि आगामी दिनों में भी कथा के साथ भजन-कीर्तन, महाआरती एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के चलते पूरे दोकड़ा क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का वातावरण बना हुआ है।
