छत्तीसगढ़ TLPS-2025 रिपोर्ट जारी, प्राथमिक शिक्षा में सुधार और बुनियादी साक्षरता को मिलेगी नई दिशा

रायपुर/जशपुर, 19 जुलाई।छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS)-2025 रिपोर्ट जारी की गई। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF), टाटा ट्रस्ट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में यह रिपोर्ट 18 जुलाई को एससीईआरटी, रायपुर के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में जारी की गई।रिपोर्ट का उद्देश्य कक्षा 1 एवं 2 में शिक्षण की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और शुरुआती वर्षों में अपनाई जा रही शिक्षण पद्धतियों का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन केंद्र सरकार के ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत राज्य में FLN को मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित होगा।कार्यक्रम में एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक जे. पी. रथ, पद्मश्री एवं एलएलएफ के राष्ट्रीय सलाहकार (बहुभाषी शिक्षा) महेंद्र कुमार मिश्रा, टाटा ट्रस्ट की डिप्टी हेड ऑफ प्रोग्राम्स अमृता पटवर्धन, एलएलएफ के संस्थापक डॉ. धीर झिंगरन, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, समग्र शिक्षा के प्रतिनिधि, राज्य संसाधन समूह (SRG) के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के शिक्षा विशेषज्ञ मौजूद रहे।

इस अवसर पर डाइट (DIET) जशपुर के प्राचार्य एम. ज़ेड. यू. सिद्दीकी ने कहा कि अच्छी नीतियां और पर्याप्त संसाधन तभी सफल माने जाएंगे, जब उनका सकारात्मक प्रभाव सीधे कक्षाओं में दिखाई दे। वहीं एससीईआरटी की राज्य स्रोत समूह की सदस्या पुष्पा शुक्ला ने बच्चों के सीखने के परिणाम बेहतर बनाने के लिए शिक्षण प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षनवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच कबीरधाम और नारायणपुर जिले की 100 प्राथमिक कक्षाओं में किए गए प्रत्यक्ष अध्ययन में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए—84 प्रतिशत स्कूलों में एक ही कक्षा में अलग-अलग सीखने के स्तर वाले बच्चों को साथ पढ़ाया जा रहा है।66 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की स्थानीय मातृभाषा से परिचित पाए गए।82 प्रतिशत कक्षाओं में गतिविधियों के दौरान बच्चों के कार्यों की नियमित व्यक्तिगत निगरानी का अभाव देखा गया।70 प्रतिशत कक्षाओं में बच्चों के सीखने के स्तर के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में आवश्यक लचीलापन नहीं पाया गया।सर्वे की रूपरेखा और निष्कर्ष एलएलएफ के सीनियर एकेडमिक स्पेशलिस्ट अजय गुप्ता तथा सीनियर स्पेशलिस्ट (बहुभाषी शिक्षा) संजय गुलाटी ने प्रस्तुत किए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिरिक्त संचालक जे. पी. रथ ने कहा कि ऐसी कक्षाओं की जरूरत है, जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी गलतियों से सीख सकें। उन्होंने कहा कि जब छात्र बिना भय के अपनी गलती स्वीकार करता है, तभी वास्तविक सीखने की प्रक्रिया शुरू होती है।

एलएलएफ के संस्थापक डॉ. धीर झिंगरन और टाटा ट्रस्ट की अमृता पटवर्धन ने छत्तीसगढ़ की भाषाई और भौगोलिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट सरकार और सहयोगी संस्थाओं को जमीनी जरूरतों के अनुरूप कार्य करने का मजबूत आधार प्रदान करेगी।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में स्थापित लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) देश के 10 राज्यों में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी साक्षरता और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। संस्था अब तक 2.18 करोड़ बच्चों और 11.8 लाख शिक्षकों तक अपनी पहुंच बना चुकी है।

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