👉दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूरे विश्व में शांति की स्थापना के साथ -साथ विश्व के देशों में पारस्परिक मैत्रीपूर्ण समन्वय बनाना,एक दुसरे के अधिकार एव स्वतंत्रता को सम्मान के साथ बढ़ावा देना,विश्व में गरिबी उन्नमुलन ,शिक्षा एवम स्वास्थ्य के विकास को बढ़ाने के उद्देश्य से 24 , अक्टूबर 1945 को “संयुक्त राष्ट्र संघ ” का गठन किया गया l जिसमे भारत सहित193 देश सदस्य हैं l गठन के 50 वर्ष बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह अनुभव किया l की 21 वीं सदी में भी विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत मूलनिवासी समाज अपनी उपेक्षा ,गरीबी अशिक्षा ,स्वास्थ्य सुविधा का अभाव,बेरोजगारी बंधुवा मजदूर जैसे समस्याओं से ग्रसित है ,मूल निवासी समाज के उक्त समस्याओं के निराकरण हेतु विश्व ध्यानाकर्षण के लिये 1994 में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासभा द्वारा प्रति वर्ष 9 अगस्त को “International day of The world’s Indigenous People “विश्व आदिवासी दिवस मनाने का फ़ैसला किया गया l और 9 अगस्त को पुरे विश्व में आदिवासी दिवस बड़े जोर-शोर से मनाया जाता है lविश्व आदिवासी दिवस आदिवासी इतिहास को दुबारा जगाने का ,संस्कार ,संस्कृति ,परंपराओं,तीज त्योहार ,और इस देश के मूलनिवासी समाज के ऊपर हो रहे ,अत्याचार,जल जंगल जमीन को उद्योग हेतु दोहन करके आदिवासीयों का विस्थापन ,भारत का संविधान में बाबासाहेब अंबेडकर के द्वारा प्रदत मौलिक अधिकार जैसे पेसा कानून ,5वीं अनुसूची , 6वांअनुसूची वन अधिकार संरक्षण अधिनियम जैसे अधिकार से वचित और अनदेखी करके शोषित किया जाना l तमाम प्रकार की समस्यायों को इस मंच के माध्यम से राज्य और देश विदेश के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ ,तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाना है ,ना कि इस मंच के माध्यम से कोई राजनीतिक उठापटक ,आरोप प्रत्यारोप किया किया जाना है ,यह मंच एक सामाजिक और आदिवासी संवैधानिक अधिकारो को जानकर,आदिवासी समाज के संगठन को मजबूत करना ,तथा जागरुकता लाना,शिक्षा, स्वास्थ्य,एवम रोजगार के प्रति जागरुक करना,और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना,आदिवासी समाज के अंदर पनपता “नशापान”जैसे महामारी से निकालकर ,युवाओं सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जोड़कर ,इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक ,और रोजगारउन्नमुखी योजना से जोड़कर एक विकसित समाज का निर्माण करना है l विश्व आदिवासी दिवस अपनी संस्कृति परंपराओं संस्कारों,तीज त्योहर,और इतिहास को जानने,तथा देश विदेश में मूलनीवासी समाज के ऊपर हो रहे अत्याचार,अधिकारो का हनन,शोषण के ख़िलाफ़ आदिवासी आवाज को सरकार तक पहुंचाने का दिवस है l

