
कांसाबेल। सरस्वती शिशु मंदिर कांसाबेल में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सामूहिक राष्ट्रगीत गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह ठीक 11 बजे विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं उपस्थित अतिथियों ने अनुशासनबद्ध तरीके से सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से पूरा विद्यालय परिसर देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों द्वारा पहले से ही सभी तैयारियां सुनिश्चित की गई थीं। निर्धारित समय पर विद्यार्थियों ने कतारबद्ध होकर पूरे अनुशासन के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।कार्यक्रम का संचालन सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्या श्रीमती टिकेश्वरी शर्मा ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में विकासखंड शिक्षा अधिकारी गोपाल राम, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील गुप्ता मौजूद रहे। वहीं शिशु मंदिर संस्थान के अध्यक्ष त्रिलोकचंद बंसल, उपाध्यक्ष अनुपचंद जिंदल, व्यवस्थापक मिथिलेश कुमार गुप्ता, सह-व्यवस्थापक शान्तनु गर्ग, कोषाध्यक्ष प्रभात शर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।सालिक साय ने बताया ‘वंदे मातरम्’ का महत्वमुख्य अतिथि सालिक साय ने अपने संबोधन में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश के प्रति प्रेम, सम्मान और समर्पण की भावना को व्यक्त करने वाला राष्ट्रगीत है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जानने तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होती है। विद्यालय स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम नई पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।डॉ. प्रभात शर्मा ने साझा किया ऐतिहासिक महत्वकार्यक्रम में डॉ. प्रभात शर्मा ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को इसके उद्भव, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका तथा भारतीय जनमानस में इसके महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में एकता और राष्ट्रभावना जागृत करने वाले प्रमुख राष्ट्रीय गीतों में से एक रहा है।विद्यालय की भूमिका पर मिथिलेश कुमार गुप्ता ने रखे विचारविद्यालय के व्यवस्थापक मिथिलेश कुमार गुप्ता ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विद्यालय की भूमिका और शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘वंदे मातरम्’ के भाव और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझने तथा अपने दैनिक जीवन में अनुशासन एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को अपनाने की बात कही।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों की अनुशासनबद्ध सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। निर्धारित समय पर एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया, जिससे वातावरण में देशभक्ति की भावना दिखाई दी।कार्यक्रम के अंत में प्राचार्या श्रीमती टिकेश्वरी शर्मा ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित सभी गणमान्यजनों का आभार व्यक्त किया।
