सरकारी नौकरी का मोह त्याग स्वरोजगार से संवारी किस्मत

पीएम रोजगार सृजन योजना से मिला संबल

रायपुर, 

सरकारी नौकरी का मोह त्याग स्वरोजगार से संवारी किस्मत

छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार की रोजगारोन्मुखी योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त माध्यम बन रही हैं। इसका उदाहरण कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम मुंगाडीह निवासी श्री आकाश कुमार डिक्सेना हैं, जिन्होंने सरकारी नौकरी की असफलताओं से निराश होने के बजाय स्वरोजगार को अपनाकर अपनी किस्मत संवारी है।

किसान परिवार से आने वाले आकाश डिक्सेना ने स्कूल शिक्षा के उपरांत कॉलेज से एम.ए. (अंग्रेजी एवं संस्कृत) तथा बी.एड. की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के बाद उन्होंने कुछ समय तक निजी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्य किया, किंतु सीमित वेतन के कारण वे संतुष्ट नहीं थे। इसी दौरान समाचार पत्रों के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।

आकाश ने स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया और बेकरी उद्योग हेतु लगभग 11 लाख रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत उन्हें 9 लाख 90 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। वित्त पोषण प्राप्त होने के बाद उन्होंने अपने गांव में बेकरी उद्योग की स्थापना की। अपनी बेकरी इकाई में ब्रेड, क्रीम रोल, बिस्किट सहित विभिन्न बेकरी उत्पादों का निर्माण कर स्थानीय स्तर पर बिक्री कर रहे हैं। उनके उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। इस इकाई से गांव के कुछ युवाओं को भी रोजगार मिला है। उनके माता-पिता भी इस कार्य में सक्रिय सहयोग दे रहे हैं।

आकाश बताते हैं कि वे प्रतिमाह लगभग 15,300 रुपये की ऋण किस्त नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और आज वे स्वरोजगार के माध्यम से सम्मानजनक जीवन यापन कर रहे है।

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