
रायपुर।यूजीसी के तथाकथित काला कानून के विरोध में सवर्ण समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक राजपूत क्षत्रिय महासभा भवन में आयोजित की गई। बैठक में सवर्ण समाज के प्रमुख जनों की उपस्थिति रही, जहां कानून को समाज में असमानता बढ़ाने वाला और छात्रों के अधिकारों के विरुद्ध बताया गया।बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्र–छात्राओं में अविश्वास फैलाने वाला है, सवर्ण वर्ग के साथ भेदभाव को बढ़ावा देता है और शिक्षा के अधिकार से वंचित करने की मानसिकता को दर्शाता है। साथ ही, झूठे मामलों को बढ़ावा देकर एकतरफा कार्रवाई को प्रोत्साहित करने का आरोप भी लगाया गया। सवर्ण समाज ने एक स्वर में केंद्र सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।बैठक में श्री मोरध्वज सिंह बैंस, श्री अमृत लाल, अरविन्द महाराज, पंकज पांडे, शशि व्यास, सीताराम राजपूत, रंजना सिंह ठाकुर, राम प्रकाश तिवारी, वीरेन्द्र कुमार चौबे, देवांश तिवारी, मनीष शर्मा, अजय सिंह राजपूत, श्रवण शर्मा, राजेंद्र सिंह क्षत्रिय, प्रवीण कुमार अग्रवाल, विमल कुमार ओझा, रीना राजपूत, डॉ. अजय त्रिपाठी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।चर्चा के दौरान डॉ. अजय त्रिपाठी ने बताया कि ईडब्ल्यूएस बिल 2019 के तहत केंद्र सरकार द्वारा सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ प्रदेश में आज तक इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमण डेका तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सवर्ण समाज के हित में न्याय की मांग की जाएगी।वहीं रीना राजपूत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग को उसका अधिकार नहीं दिया गया, तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
