Kota-Updete:-नगर के प्रसिद्ध गौरीशंकर-सिद्ध-हनुमान मंदिर में गणगौर मिट्टी से ईसर-गौर प्रतिमा की पुजा संपन्न।
–गणगौर-पूजा राजस्थानी संस्कृति को मानने वाली अग्रवाल समाज की महिलाएं बड़े धूमधाम से मनाती है।
दिनांक:-22/03/2026**मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़।।**करगीरोड-कोटा:-कोटा नगर के प्रसिद्ध गौरीशंकर सिद्ध-हनुमान मंदिर में 16 दिन तक गणगौर मिट्टी से ईसर-गौर की प्रतिमा की पुजा की जाती है..होली त्यौहार के दूसरे दिन से ही ये पूजा शुरू होती है..गणगौर एक प्रमुख त्योहार में से हैं..जो कि विशेष रूप से हरियाणा राजस्थान सहित पुरे भारत-वर्ष मैं अग्रवाल समाज के द्वारा राजस्थानी संस्कृति को मानने वाली महिलाएं बड़े धूमधाम से मनाती है।

गणगौर-पर्व विशेष रूप से भगवान शिव व माता-पार्वती की पूजा के लिए की जाती है:-**विशेष रूप से भगवान शिव व माता-पार्वती की पूजा के लिए मनाई जाती है..गणगौर की पूजा होली के दूसरे दिन से ही शुरू हो जाती है, जिन कन्याओं का विवाह होली के पहले या प्रथम बार होली का त्यौहार पड़ता है..तो वे महिलाएं होली के पहले अपने मायके में जाकर 16 दिन विधि विधान से रोली-मौली-कुमकुम काजल-मेहंदी-चांवल-दुबी चढ़ा कर पूरे विधि-विधान से राजस्थानी गीत गाकर पूजा करती है,एवं विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर भोग लगाया जाता है,गौरीशंकर सिद्ध हनुमान मंदिर में अग्रवाल समाज महिलाओं के द्वारा गणगौर माता की पूजा कर राजस्थानी गीत गाकर ढोल नगाड़े के साथ चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार 21 मार्च गणगौर का विसर्जन स्थानीय बंधवा तलाब में किया गया..इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं..और माता पार्वती की पूजा करती हैं..यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है,यह त्योहर पूरे भारत में मनाया जाता है..गणगौर पूजा से जुड़ी यह महत्वपूर्ण जानकारी अग्रवाल समाज के पुरोहित हरिश्चंद्र चौबे द्वारा दी गई।

