शासन की संवेदनशीलता का परिणाम: कृत्रिम पैर पाकर फिर चला आत्मविश्वास

समाज कल्याण की पहल से दिव्यांग श्री अर्जुन लाल साहू को मिली नई राह

धमतरी, 

समाज कल्याण की पहल से दिव्यांग श्री अर्जुन लाल साहू को मिली नई राह

समाज कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाएँ आज जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसका सशक्त उदाहरण कुरुद तहसील के ग्राम बकली निवासी 60 प्रतिशत अस्थि बाधित श्री अर्जुन लाल साहू (पिता श्री लखन लाल साहू) की जीवन यात्रा है, जिन्हें राज्य संसाधन एवं पुनर्वास केंद्र, माना कैंप रायपुर द्वारा निशुल्क आधुनिक कृत्रिम पैर प्रदान किया गया।
  श्री साहू लंबे समय से शारीरिक अक्षमता के कारण चलने-फिरने में कठिनाई का सामना कर रहे थे। इससे न केवल उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था, बल्कि आजीविका और सामाजिक सहभागिता में भी बाधा उत्पन्न हो रही थी। समाज कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में जब उनका पंजीयन राज्य संसाधन एवं पुनर्वास केंद्र में कराया गया, तो विशेषज्ञ चिकित्सकों और तकनीशियनों द्वारा उनका समुचित परीक्षण किया गया। अत्याधुनिक तकनीक से उनके पैर का सटीक माप लेकर, उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम पैर का निर्माण किया गया।

कृत्रिम पैर प्राप्त करने के बाद श्री साहू के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगी है। अब वे बिना सहारे चल पाने में सक्षम हो रहे हैं और आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायक उपकरण उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि सम्मान और स्वावलंबन की पुनर्प्राप्ति है।

माना कैंप रायपुर स्थित राज्य संसाधन एवं पुनर्वास केंद्र (Physical Referral Rehabilitation Center) राज्य के दिव्यांगजनों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। यहां कृत्रिम अंग निर्माण, फिजियोथेरेपी, परामर्श एवं पुनर्वास जैसी सुविधाएँ निरंतर उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

श्री अर्जुन लाल साहू की यह कहानी शासन की संवेदनशीलता, योजनाओं की प्रभावशीलता और प्रशासनिक समन्वय की सफलता को दर्शाती है। यह न केवल अन्य दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा है, बल्कि समाज के लिए भी संदेश है कि सही सहयोग और संसाधनों से हर व्यक्ति आत्मसम्मान के साथ जीवन जी सकता है।

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