
नई दिल्ली, 4 अप्रैल 2026।टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में शनिवार को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में देशव्यापी शिक्षक आंदोलन का विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक रैली में देशभर से लगभग 20 लाख शिक्षक अपनी नौकरी और अधिकारों की रक्षा के लिए एकत्रित हुए। आंदोलन में भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।इस आंदोलन का आयोजन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले किया गया। रैली में शिक्षकों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “No TET Before RTE Act” के नारे लगाए और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।रैली का नेतृत्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, केदार जैन, रविंद्र राठौर, बसंत कौशिक, राजू टंडन, धर्मदास पाटील, पोखन साहू, रामलाल साहू, मदन राठौड़, दिनेश राठौर, देवराज खूंटे, प्रकाश बघेल और अजय गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा, जो उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, ने मंच का संचालन करते हुए शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा।रैली में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।मुख्य माँगेंसंसद में विधेयक लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।नियुक्ति के समय निर्धारित मूल सेवा शर्तों का सम्मान किया जाए।20–25 वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों को नई परीक्षा के नाम पर प्रताड़ित करना बंद किया जाए।आंदोलन का संदेशशिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए और इस “काले कानून” को खत्म करना चाहिए। किसी भी शिक्षक को जबरन नई पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य न किया जाए।

