क्षितिज-अपार संभावनाएं योजना से दिव्यांग विद्यार्थियों को मिल रहा नया हौसला

शिक्षा में आगे बढ़ने का दे रही अवसर, बढ़ रहा दिव्यांग विद्यार्थियों का आत्मविश्वास

रायपुर, 

मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ यदि कोई आगे बढ़े तो कोई भी बाधा उसकी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकती। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित “क्षितिज अपार संभावनाएं” योजना ऐसे ही विद्यार्थियों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है। यह योजना दिव्यांग छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान कर उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रही है।

कबीरधाम जिले में इस योजना के माध्यम से वर्ष 2023 से 2026 तक कुल 35 दिव्यांग विद्यार्थियों को 4 लाख 76 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा चुकी है। इसमें सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 6 दिव्यांगजनों को 2 लाख 90 हजार रुपये तथा शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 29 दिव्यांग विद्यार्थियों को 1 लाख 86 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई है। इस योजना के माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों को न केवल आर्थिक सहयोग मिल रहा है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को साकार करने का नया हौसला भी मिल रहा है। शासन की यह पहल दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

कवर्धा के ऐसे ही एक होनहार छात्र रवियांशु साहू ने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि हौसले की ताकत बनाकर यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। कवर्धा के दुर्गावती चौक स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में अध्ययनरत रवियांशु साहू ने कक्षा 10वीं की परीक्षा में कुल 600 अंकों में से 378 अंक (63 प्रतिशत) प्राप्त किए। रवियांशु 40 प्रतिशत अस्थि बाधित दिव्यांग हैं, इसके बावजूद उन्होंने निरंतर परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पढ़ाई करते हुए यह सफलता हासिल की। शिक्षा सत्र 2024-25 में कक्षा 10वीं में दिव्यांगजनों की श्रेणी में जिला कबीरधाम में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र रवियांशु साहू को समाज कल्याण विभाग द्वारा 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि उन्हें उनकी शैक्षणिक उपलब्धि के लिए प्रोत्साहन स्वरूप दी गई।

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