Kota-Updete:-डीकेपी से लेकर आत्मानंद-पीएम-श्री..नाम बदला व्यवस्था-इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं।-

**एक प्रायवेट स्कूल के उद्घाटन में शनिवार को पहुंचे शिक्षा मंत्री जी ने कहा कि 150-नए विवेकानंद स्कूल खोला जाएगा।

*दिनांक:-05/04/2026**मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़।।**करगीरोड-कोटा:-कोटा नगर का सबसे पुराना शासकीय उच्चतर हाईस्कूल-हायर-सेकेडरी डीकेपी स्कूल जो कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय नाम परिवर्तन कर आत्मानंद कर दिया गया था..? उस समय विपक्ष में रही मौजूदा बीजेपी सरकार के कोटा नगर के जनप्रतिनिधियो ने नाम बदलनेबको लेकर विरोध जताया था..? वर्तमान में एक बार फिर से आत्मानंद स्कूल का नाम बदलकर पीएम_श्री कर दिया गया है..?स्कूलों के नाम में बदलाव लगातार जारी है..?डीकेपी स्कूल की आत्मा वही है..?सत्ता सरकार बदलते ही नाम-परिवर्तन जारी है..? व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं..?स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग चोक हो चुका है..?बच्चों को पढ़ाने वाले हिंदी-इंग्लिश माध्यम टीचरों की कमी लगातार बनी हुई है.? जो वर्तमान में पढ़ा रहे हैं..उनका रिटायरमेंट भी करीब है..?उसके बाद आगे बच्चों का भविष्य क्या होगा..शासन प्रशासन जाने या फिर आत्मानंद स्वामी जाने या फिर प्रधानमंत्री जी जाने..?

सीबीएसई-बोर्ड-पैटर्न के नाम से बेवकूफ बनाया जा रहा है प्रायवेट स्कूलों द्वारा:—**शासकीय स्कूलों में टीचरों की कमी इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी से ऐसा प्रतीत होता है..जैसे कि शासन प्रशासन द्वारा जानबूझकर ये समस्या पैदा की जा रही है..?ताकि मध्यवर्गीय परिवार के बच्चों के अभिभावक उन्हें शासकीय स्कूलों से निकालकर प्रायवेट स्कूलों में भर्ती कर सके..? दूसरी बात इस समय पूरे प्रदेश सहित जिले के अधिकांश प्रायवेट स्कूलों में सीबीएसई नाम पेटर्न उपयोग कर बच्चों के साथ अभिभावकों को बेवकूफ बनाना जा रहा है..?मगर उन स्कूलों पर कार्यवाही करने के बजाए शिक्षा-विभाग व उसके मातहत प्रायवेट स्कूलों का गुणगान कर रहे वैदिक मंत्रों के साथ उद्घाटन कर रहे हैं..? गजब है..?

2009 में लागू हुआ राइट-टू- एजुकेशन शिक्षा का अधिकार जिसका मुख्य मूलमंत्र था हर बच्चों का निःशुल्क शिक्षा का अधिकार वो पूरा मूलमंत्र ही बदल दिया गया..शिक्षा-विभाग द्वारा मौजुदा समय में स्कूलों का व्यवसायीकरण हो चुका है..?हाल के दिनों में रानीसागर मौहारखार स्कूल में स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल जो कि सालों से स्कूल संचालित कर रहा था अचानक से अपना बोरिया बिस्तर समेट कर भाग खड़ा हुआ..?आरटीई के तहत पढ़ने वाले 80 बच्चों का भविष्य अंधकार मय हो गया..?

कोई सुनवाई नहीं..?शिक्षा मंत्री/केंद्रीय राज्यमंत्री सहित शिक्षा-विभाग के मातहतों को ज्ञापन सौंपने वाले परिजनों को केवल आश्वाशन का झुंनझुना थमा दिया गया है।

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