Kota-Updete:-विकास-कार्यों के नाम पर पेड़ो की बलि…मलबों के बीच छांव की तलाश में भटकते शहरी-ग्रामीण जन।-

अतिक्रमण-हटाने के दौरान प्रशासनिक-अमले पर मां-मौसी का आरोप कितना सही कितना गलत…सोशल-मीडिया में दिखा जनआक्रोश –

कार्यवाही से पहले बैठक में उपस्थित-लोगों ने आईएएस अधिकारी को क्या मिसगाइड किया गया..?

बुलडोजर कार्यवाही के बाद प्रशासनिक-अधिकारीयो सहित नगर के सफेदपोश नेताओं पर नगरवासियों ने सोशल-मीडिया पर निकाली भड़ास।

**दिनांक:-13/04/2026**मोहम्मद जावेद खान हरित छत्तीसगढ़।।**करगीरोड-कोटा:-अतिक्रमण दस्ते में शामिल पूरे प्रशासनिक अमले ने नगर के विकास में बाधा बन रहे अवैध निर्माण पर 24 से 48 घंटे में बुलडोजर चलाकर अपनी प्रशासन क्षमता का असर दिखा दिया..पिछले 02-दिनों से नगर पंचायत द्वारा मलबा हटाने का काम भी शुरू कर चुका है, कोटा नगर के आमजनों सहित कुछ व्यापारियों ने तोड़फोड़ के दौरान प्रशासनिक अमले पर मां मौसी का आरोप भी लगाया जो कि कुछ हद तक सही है..तोड़फोड़ के दौरान कोटा-नगर में अधिकांश जगह ऐसे भी दिखाई दी जो अभी भी मौजूद है..जिन्हें अतिक्रमण दस्ते द्वारा छुआ तक नहीं गया..?जबकि उसके अगल-बगल वाली जगह पर जमकर बुलडोजर चला है..?

क्या आईएएस अधिकारी को मिसगाइड किया गया:–

आखिर किसके कहने किसके दबाव पर कार्यवाही इन जगहों पर नहीं किया गया..?

इससे पूर्व कोटा नगर में प्रशिक्षु-आईएसय-आई अधिकारी बेखौफ होकर अपनी कार्यवाही करके चले गए खासकर जनहित बुनियादी मुद्दों से जुड़े मामलों को लेकर जिसको लेकर नगर सहित ग्रामीण इलाकों के आमजनों ने स्वागत किया था, फिर वर्तमान में पदस्थ प्रशिक्षु आईएस-एसडीएम कोटा को आखिर मिसगाइड किसने किया..?

तोड़फोड़ की कार्यवाही से पहले उन्होंने कोटा नगर के बुद्धिजीवी वर्ग व्यापारी बंधुओं को भरोसे में क्यों नहीं लिया..?आखिर कार्यवाही से पहले बैठक में कोटा नगर के वो कौन बुद्धिजीवी सफेदपोश लोग मौजूद थे,जिन्होंने पूरे नगर के छोटे बड़े व्यापारियों की बात करने के बजाए कुछ लोगों की ही बात की गई..?क्या बैठक में उपस्थित लोगों ने ही प्रशिक्षु-आईएस को मिशगाइड किया है..? बावजूद एक आईएएस अधिकारी अपने विवेक का इस्तेमाल करके कोटा नगर के आमजनों-व्यापारियों से समन्वय बनाकर क्यों सहयोग नहीं लिया गया..?

क्या वर्तमान प्रशिक्षु-आईएस एसडीएम कोटा भी सफेदपोश नेताओं के ट्रैप में फंस गए..?

अगर ऐसा नहीं था तो तोड़फोड़ की पूरी कार्यवाही में कुछ जगहों को क्यों छोड़ दिया गया..?पक्षपात पूर्ण रवैए तानाशाही कार्यवाही से नगर के लोगों का आक्रोश होना स्वाभाविक है-?

मां के नाम इसके नाम उसके नाम पर लगा पौधा-पेड़ नहीं बन पाया:–

कोटा-नगर के इतिहास में ये पहली बार नहीं हुआ है..?इससे पहले आप थोड़ा पीछे जाए तो वो कोटा थाना आगजनी कांड हो या फिर रेलवे का आंदोलन हो..?

कोटा थाना आगजनी-कांड में तो कोटा नगर के कुछ सफेदपोश नेताओं ने गलत तरह से की जा रही प्रशासनिक-कार्यवाही का सामने से विरोध भी किया था..पर वर्तमान में गलत तरीके से की जा रही कार्यवाही का विरोध करने वाला एक भी सफेदपोश जिन्हें कोटा नगर की जनता अपना नेता समझते हैं..?सामने नहीं आया..?

नगर-विकास के नाम पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर इससे पूर्व में भी सड़क निर्माण नाली निर्माण कार्य हुए सड़क किनारे हरे भरे पेड़ो को काट दिए गए..पेड़ो का महत्व लोगो को अभी समझ में आ रहा है..?अतिक्रमण हटाने तोड़फोड़ के बाद शादी के सीजन सहित जरूरी कामों के लिए कोटा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के महिला-पुरुष वर्ग बैंको में व्यापारियों के यहां खरीददारी के बीच तेज धूप में खड़े होने मजबूर है अगर पेड़ पौधे होते तो उनका ही सहारा होता..? छावनी जो बने थे वो अतिक्रमण के दायरे में आ गए और तोड़ दिए गए…बारिश की शुरुवात शासन प्रशासन द्वारा मां के नाम पर महापुरुषों के नाम पर दिवंगत स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पेड़ पौधे लगाए जाते हैं-?

और जिनके द्वारा लगाए जाते है, वो एक बार उस पौधे पर खाद पानी देकर फोटोसेशन कराकर आने वाले बारिश का इंतजार करने लगते हैं..?

आने वाले बारिश तक पुराने पौधे खाद पानी के अभाव में दम तोड़ देते हैं..या फिर पौधे लगाने वाले की परछाई से दम तोड़ देते हैं-?

चूंकि पेड़ पौधे बेजुबान होते हैं, पर कलमकारों को इशारा बता देते हैं..फिलहाल आगे देखना होगा कि नगर पालिका से नगर पंचायत में तब्दील पुनः से एक बार फिर नगर पालिका बने कोटा को महानगर बनाने स्टेट हाईवे से नेशनल हाईवे के नाम पर विकास कार्यों के नाम पर व्यापार के नाम पर हटाए गए अतिक्रमण के कितने घंटों दिनों महीनों सालों में नजारा दिखाई देगा..वर्तमान में इस समय नगर में करोड़ो के विकास कार्य कागजों में दिखाई तो दे रहे हैं..?जमीनी स्तर के बजाए..?*✒️🌴✒️🌴✒️🌴✒️🌴

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